सूरत नगर निगम चुनाव:वार्ड 21 में विरोध के बाद भाजपा को बदलनी पड़ी उम्मीदवार, संगठन में असंतोष खुलकर आया
राजस्थानी-अग्रवाल समाज की नाराजगी के बाद दीपिका धूत की जगह सुमनदेवी गर्ग को टिकट, वार्ड-20 में ‘आयातित’ उम्मीदवार प्रतिभा देसाई के खिलाफ कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

सूरत। सूरत महानगरपालिका चुनाव के लिए भाजपा द्वारा उम्मीदवारों की सूची जारी होते ही कई वार्डों में असंतोष खुलकर सामने आ गया। विशेष रूप से वार्ड नंबर-20 और 21 में स्थानीय कार्यकर्ताओं और समाजों की नाराजगी के चलते पार्टी को डैमेज कंट्रोल करना पड़ा और वार्ड-21 में महिला उम्मीदवार तक बदलनी पड़ी।
भाजपा ने शुक्रवार देर रात जारी सूची में वार्ड-21 (सोनी फलिया-नानपुरा-अठवा-पिपलोड) से दीपिका अंकुशभाई धूत, डिम्पल चेतनभाई कापड़िया, अशोक रांदेरीया और व्रजेश उंडकट के नाम घोषित किए थे। सूची जारी होते ही अठवा और पिपलोड क्षेत्र में बड़ी संख्या में रहने वाले राजस्थानी-अग्रवाल समाज ने विरोध शुरू कर दिया। समाज के पदाधिकारियों और नेताओं ने देर रात से लेकर सुबह तक लगातार बैठकों का दौर चलाया और टिकट बदलने की मांग पर अड़े रहे।
दरअसल, वार्ड-22 से रश्मी साबू को भी टिकट दिया गया था, जो राजस्थानी-माहेश्वरी समाज से थीं। एक ही समाज को दो टिकट मिलने पर अग्रवाल समाज के नेताओं ने भाजपा नेतृत्व से नाराजगी जताई। विरोध बढ़ने के बाद रविवार सुबह भाजपा नेतृत्व को झुकना पड़ा और दीपिका धूत का टिकट रद्द कर कपड़ा उद्योग से जुड़े उद्योगपति विमल गर्ग की पत्नी सुमनदेवी गर्ग को उम्मीदवार घोषित किया गया। टिकट बदलने के बाद अग्रवाल समाज में उत्साह का माहौल देखा गया, जबकि इस पूरे घटनाक्रम ने वार्ड-21 को चुनावी रूप से चर्चित बना दिया।
वहीं, वार्ड नंबर-20 (खटोदरा-मजूरा-सगरामपुरा) में एडवोकेट प्रतिभा देसाई को उम्मीदवार बनाए जाने पर स्थानीय कार्यकर्ताओं ने भाजपा शहर कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि वार्ड में वर्षों से सक्रिय स्थानीय महिला कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर ‘आयातित’ उम्मीदवार को टिकट दिया गया है।
इस दौरान सिंधी समाज ने भी नाराजगी जताई। समाज के नेताओं का कहना था कि इस बार सिंधी समाज को एक भी टिकट नहीं दिया गया। पूर्व स्थायी समिति अध्यक्ष अनिल गोपलानी वार्ड-22 से मजबूत दावेदार थे, लेकिन उनका नाम भी सूची से बाहर कर दिया गया, जिससे समाज में असंतोष बढ़ गया।
उम्मीदवारों को लेकर बढ़ते विरोध और टिकट बदलाव की घटनाओं ने भाजपा के भीतर स्थानीय स्तर पर खींचतान को उजागर कर दिया है। चुनाव से पहले सामने आए इस असंतोष ने सूरत की राजनीतिक स्थिति को और दिलचस्प बना दिया है।


