
सूरत। शहर के लिंबायत क्षेत्र स्थित मिठी खाड़ी बैठी कॉलोनी में घर के अंदर साड़ी फोल्डिंग के काम के दौरान लगी भीषण आग में मासूम सहित पांच लोगों की मौत की दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। इस हादसे ने रिहायशी मकानों में ठसाठस साड़ी का जथ्था भरकर काम करने वाले लोगों की लापरवाही और जोखिम भरे माहौल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कपड़ा मार्केट के नजदीक होने के कारण मिठी खाड़ी क्षेत्र के अधिकांश घरों में साड़ी फोल्डिंग और साड़ी पर जरी लगाने का काम किया जाता है। यह काम यहां रहने वाले गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों के लिए आय का प्रमुख साधन भी है। इसी कारण इस क्षेत्र में मकानों का किराया भी सामान्य से अधिक है और मकान मालिक किरायेदारों से ऊंचा किराया वसूलते हैं। मजबूरी में लोग अपने ही रहने वाले छोटे कमरों में साड़ियों का बड़ा जथ्था जमा कर काम करते हैं, जो हादसों का कारण बन रहा है।
गुरुवार को हुई इस दर्दनाक घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। फायर विभाग के अनुसार यदि समय रहते लोग बाहर निकलते तो संभवतः उनकी जान बच सकती थी, लेकिन घबराहट और आग की तेजी के कारण वे बाहर नहीं निकल पाए। साड़ियों में मौजूद कपड़ा और प्लास्टिक सामग्री के कारण आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया और कुछ ही समय में पूरा कमरा आग की चपेट में आ गया।
लिंबायत क्षेत्र में छोटे-छोटे कमरों में परिवारों का रहना और उसी जगह पर साड़ियों का जथ्था जमा कर काम करना आम बात है, लेकिन यह व्यवस्था बेहद खतरनाक साबित हो रही है। इस घटना के बाद लोगों को सबक लेने की जरूरत है कि रहने की जगह और काम की जगह अलग रखें, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं से बचा जा सके।
इसके साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि मकान मालिक किराया दरों को सामान्य रखें, जिससे मजदूर वर्ग के लोग माल रखने के लिए अलग जगह की व्यवस्था कर सकें। अधिक किराया होने के कारण लोग मजबूरी में रहने वाले घरों में ही जथ्था जमा करते हैं, जो अंततः जानलेवा साबित हो सकता है।
लिंबायत की इस दर्दनाक घटना ने रिहायशी इलाकों में चल रहे असुरक्षित लघु उद्योगों पर नियंत्रण और सुरक्षा नियमों के पालन की आवश्यकता को फिर से उजागर कर दिया है।



