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मात्र 5 पैसे के लिए 40 साल तक चला केस

बस कंडक्टर ने बेगुनाही साबित करने के लिए जिंदगी के चार दशक अदालतों में बिताए

नई दिल्ली। दिल्ली से सामने आई एक चौंकाने वाली घटना ने न्याय व्यवस्था में हो रही देरी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला एक बस कंडक्टर का है, जिसने मात्र 5 पैसे की कथित हेराफेरी के आरोप को गलत साबित करने के लिए अपनी जिंदगी के करीब 40 साल अदालतों में बिताए।
यह मामला वर्ष 1973 का है, जब रणवीर सिंह यादव दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) में बस कंडक्टर के रूप में कार्यरत थे। उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने 10 पैसे की टिकट के बदले एक महिला यात्री से 15 पैसे लिए और 5 पैसे अपने पास रख लिए। इस आरोप के बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू हुई और कुछ वर्षों बाद उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।
नौकरी जाने के बाद रणवीर सिंह यादव ने न्याय के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की। यह लड़ाई इतनी लंबी चली कि उन्होंने अपने जीवन के चार दशक अदालतों के चक्कर काटते हुए गुजार दिए। आखिरकार, लंबे इंतजार के बाद उन्हें न्याय मिला और अदालत ने उन्हें राहत प्रदान की।
यह मामला सामने आने के बाद लोगों में भावुक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, वहीं न्याय मिलने में हुई देरी को लेकर व्यवस्था पर सवाल भी उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों से न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने की आवश्यकता साफ दिखाई देती है, ताकि किसी व्यक्ति को छोटी सी बात के लिए वर्षों तक संघर्ष न करना पड़े।

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