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आयातित नायलॉन यार्न पर एंटी डंपिंग ड्यूटी की सिफारिश के विरोध में केंद्रीय वित्त मंत्रालय में प्रस्तुति

डीजीटीआर पर स्पिनर्स की मजबूत आर्थिक स्थिति की जानकारी नजरअंदाज कर वीवर्स के साथ अन्याय करने का आरोप

सूरत। आयातित नायलॉन यार्न पर एंटी डंपिंग ड्यूटी (ADD) लगाने की सिफारिश के विरोध में सूरत के वीवर्स संगठनों ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय में विस्तृत प्रस्तुति देकर आपत्ति दर्ज कराई है। वीवर्स प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) ने अंतिम निष्कर्ष देते समय कई महत्वपूर्ण आर्थिक एवं तकनीकी तथ्यों की अनदेखी करते हुए एकतरफा निर्णय दिया है।
जानकारी के अनुसार, सीमित संख्या में स्पिनर्स द्वारा आयातित नायलॉन यार्न पर ADD लगाने की मांग करते हुए DGTR में याचिका दाखिल की गई थी। इसके बाद लंबे समय तक चरणबद्ध तरीके से वीवर्स और स्पिनर्स दोनों पक्षों की सुनवाई की गई। वीवर्स को उम्मीद थी कि सभी तथ्यों के आधार पर न्यायसंगत निर्णय होगा, लेकिन अंतिम निष्कर्ष में DGTR द्वारा स्पिनर्स के पक्ष में फैसला दिए जाने से वीवर्स समुदाय में नाराजगी फैल गई है।
वीवर्स संगठनों ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय में गौरव सिंह को लिखे पत्र में विस्तृत आंकड़ों सहित बताया है कि किस प्रकार DGTR ने महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए वीवर्स के हितों की उपेक्षा की। स्पिनर्स का दावा था कि आयातित नायलॉन यार्न के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है, जबकि वीवर्स संगठनों ने अपनी प्रस्तुति में कहा कि स्थानीय स्पिनर्स गुणवत्तापूर्ण उत्पादन करने में सक्षम नहीं हैं और यार्न की कीमतों में मनमानी बढ़ोतरी कर वीवर्स का शोषण कर रहे हैं।
DGTR के अंतिम निर्णय के बाद वीवर्स उद्योग में आयातित नायलॉन यार्न महंगा होने की आशंका से चिंता का माहौल है। सूरत के वीवर अग्रणी मयूर गोलवाला ने कहा कि DGTR का निर्णय अंतिम नहीं है तथा आदेश के बाद 90 दिनों का समय उपलब्ध है। उन्होंने वीवर्स से अपील की कि अफवाहों से प्रभावित होकर गलत स्टॉकिंग न करें और जल्दबाजी में निर्णय न लें।
वीवर्स संगठनों ने DGTR के निर्णय पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि DGTR ने पिछले वर्ष स्पिनर्स की मजबूत आर्थिक स्थिति से जुड़े आंकड़ों की अनदेखी की, जबकि वर्तमान में यार्न की भारी कमी के बावजूद स्पिनर्स द्वारा प्रति माह 3000 टन उत्पादन विस्तार की योजना बताती है कि उन्हें किसी प्रकार का आर्थिक नुकसान नहीं हो रहा।
रिप्रेजेंटेशन में यह भी कहा गया कि DGTR ने तकनीकी तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए पुराने 6-12 एंड वाइंडर्स मशीनों का उपयोग करने वाली स्थानीय इकाइयों की अक्षमता को स्वीकार करने के बजाय ADD के माध्यम से उसे संरक्षण प्रदान किया है। जबकि आधुनिक 24-एंड वाइंडर्स तकनीक की तुलना में पुरानी मशीनरी उत्पादन क्षमता को प्रभावित करती है।
वीवर्स के अनुसार नायलॉन मदर यार्न में प्रतिमाह लगभग 7000 टन की कमी पहले से मौजूद है। ऐसे समय में ड्यूटी की सिफारिश कृत्रिम आपूर्ति संकट उत्पन्न करेगी, जिससे पावरलूम उद्योग पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, इकाइयों के बंद होने और बेरोजगारी बढ़ने की आशंका है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि स्थानीय स्पिनर्स द्वारा गुणवत्तापूर्ण यार्न उत्पादन के पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं होने के बावजूद DGTR ने “समान उत्पाद” के दावे को स्वीकार कर बड़े उत्पादकों के हितों को प्राथमिकता दी। वीवर्स द्वारा बौबिन की लंबाई और वजन में असमानता जैसे गुणवत्ता संबंधी प्रमाण (पैकिंग लिस्ट एवं इनवॉइस) प्रस्तुत किए जाने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया गया।
वीवर्स संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि सामान्य प्रक्रिया के अनुसार कम से कम तीन निर्यातक समूहों की जांच होनी चाहिए थी, लेकिन यहां केवल दो समूहों का चयन किया गया, जिससे डंपिंग मार्जिन के आंकड़ों को स्थानीय उत्पादकों के पक्ष में प्रस्तुत किया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि कुछ स्थानीय उत्पादक स्वयं नायलॉन यार्न आयात करते हुए भी ADD की मांग कर रहे हैं, जो विश्लेषण प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
वीवर्स द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार आयातित यार्न के मूल्य में 19 प्रतिशत वृद्धि हुई है, जबकि स्थानीय लागत में केवल 12 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। इसके बावजूद DGTR ने इस तथ्य की अनदेखी करते हुए ADD लगाने की सिफारिश की, जिसे वीवर्स ने उद्योग विरोधी निर्णय बताया है।
वीवर्स संगठनों ने केंद्रीय सरकार से मांग की है कि अंतिम निर्णय लेने से पहले डाउनस्ट्रीम पावरलूम उद्योग, रोजगार और टेक्सटाइल सेक्टर पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों को ध्यान में रखा जाए।

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