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टेक्सटाइल उद्योग में श्रमिक परिवारों की भूखे पेट सोने जैसी स्थिति, गैस के बिना खाना बनाना मुश्किल

सूरत। सूरत के टेक्सटाइल उद्योग में काम करने वाले हजारों प्रवासी मजदूरों के लिए रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की कमी गंभीर समस्या बनती जा रही है। फेडरेशन ऑफ गुजरात वीवर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने इस संबंध में जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर बताया कि गैस नहीं मिलने के कारण मजदूरों को भूखे रहना पड़ रहा है या फिर अपने वतन लौटने की मजबूरी बन रही है, जिससे टेक्सटाइल उद्योग पर सीधा असर पड़ रहा है।
फोगवा के अध्यक्ष अशोक जीरावाला ने बताया कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण गैस सप्लाई में कमी आई है और काला बाजार में कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो गई है। रोज कमाने-खाने वाले 500-600 रुपये कमाने वाले मजदूरों के लिए गैस सिलेंडर खरीदना मुश्किल हो गया है।
इसके चलते कई मजदूर खाना नहीं बना पा रहे हैं और बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे अपने गृह राज्यों की ओर वापस लौटने को मजबूर हो रहे हैं। इस स्थिति के कारण टेक्सटाइल उद्योग में श्रमिकों की कमी पैदा होने लगी है, जिससे उत्पादन और पूरी आर्थिक व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।
प्रोडक्शन कटौती पर बुलाएंगे सार्वजनिक बैठक
एसोसिएशन ने मांग की है कि आधार कार्ड के आधार पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाए, टेक्सटाइल क्षेत्रों में पर्याप्त गैस सप्लाई सुनिश्चित की जाए, काला बाजारी पर सख्त कार्रवाई की जाए तथा मजदूरों के लिए विशेष राहत केंद्र स्थापित किए जाएं।
फेडरेशन ऑफ गुजरात वीवर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा वर्तमान स्थिति को देखते हुए वीवर्स के बीच गूगल फॉर्म के माध्यम से सर्वे कराया गया था। इस सर्वे में 85% वीवर्स ने प्रोडक्शन कटौती के पक्ष में सहमति जताई है।
इसको ध्यान में रखते हुए फेडरेशन द्वारा विभिन्न एसोसिएशनों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी, जिसके बाद एक सार्वजनिक सभा बुलाई जाएगी। इस सार्वजनिक सभा में सर्वसम्मति से यह तय किया जाएगा कि प्रोडक्शन कटौती कैसे और कितने समय के लिए लागू की जाए।

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