
अहमदाबाद। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति का असर अब गुजरात के प्रमुख बंदरगाहों पर भी दिखाई देने लगा है। कांडला और मुंद्रा पोर्ट पर एक्सपोर्ट के लिए तैयार कंटेनर बड़ी संख्या में फंसे पड़े हैं, जिससे निर्यातकों पर डेमरेज चार्ज का भारी बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, यह राशि लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है।
जानकारी के मुताबिक सामान्य परिस्थितियों में कांडला और मुंद्रा पोर्ट से रोजाना करीब 400 से 500 एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट कंटेनरों की आवाजाही होती है, लेकिन वर्तमान वैश्विक तनाव के कारण आयात-निर्यात की गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं। पोर्ट और वेयरहाउस में कंटेनरों का भारी जमावड़ा हो गया है। कंटेनर फंसे रहने के कारण प्रतिदिन 500 से 1000 रुपये या उससे अधिक का डेमरेज चार्ज बढ़ता जा रहा है, जिससे निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। निर्यातकों को आशंका है कि माल भेजने से पहले उन्हें भारी डेमरेज शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा।
दूसरी ओर खाड़ी देशों से आने वाले मशीन पार्ट्स, ड्राय फ्रूट, ऑयल, पल्स, इंडस्ट्रियल डीजल और केरोसीन की आयात प्रक्रिया भी लगभग बंद हो गई है। विशेष रूप से इंडस्ट्रियल डीजल और केरोसीन की सबसे अधिक आयात गुजरात के इन दोनों पोर्ट पर होती है। यह डीजल औद्योगिक उपयोग और परिवहन क्षेत्र में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। पहले भी इंडस्ट्रियल डीजल के नाम पर मिश्रित डीजल लाने के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन फिलहाल आयात में भी पूरी तरह ब्रेक लग गया है।
सूत्रों के अनुसार, कांडला और मुंद्रा पोर्ट से खाड़ी देशों के अलावा यूके, अमेरिका और रूस में बड़ी मात्रा में एग्रो प्रोडक्ट का निर्यात किया जाता है, लेकिन वर्तमान हालात में निर्यात प्रभावित हो गया है। इससे लंबे समय में निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है और कई ऑर्डर रद्द होने की आशंका भी जताई जा रही है।
मुंबई के न्हावा शेवा पोर्ट के बाद गुजरात के कांडला और मुंद्रा पोर्ट को देश के सबसे बड़े आयात-निर्यात केंद्रों में गिना जाता है, लेकिन फिलहाल समुद्र में जहाजों की आवाजाही भी कम हो गई है। आयात-निर्यात गतिविधियों के प्रभावित होने से ट्रांसपोर्टरों को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए निर्यातक और आयातक दोनों ही बड़े आर्थिक नुकसान की आशंका से चिंतित हैं।



