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फरियादी की मृत्यु से कर्ज खत्म नहीं होता : कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

यार्न खरीद के 22 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में आरोपी को 1 वर्ष की सजा

सूरत। शहर के टेक्सटाइल बाजार से जुड़े एक चेक बाउंस मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि फरियादी की मृत्यु हो जाने मात्र से आरोपी की देनदारी समाप्त नहीं होती। पिता के निधन के बाद पुत्र द्वारा कानूनी लड़ाई जारी रखने पर कोर्ट ने आरोपी व्यापारी को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष की सजा सुनाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रिंगरोड स्थित धनलक्ष्मी मार्केट में कपड़ा व्यापार करने वाले स्व. आदिशभाई धनकुमार जैन की पहचान रांदेर रोड निवासी व्यापारी दिनेश नामचंद तलरेजा से हुई थी। वर्ष 2015 से 2017 के दौरान दिनेश तलरेजा ने आदिशभाई जैन से लगभग 25 लाख रुपये का यार्न माल खरीदा था। आंशिक भुगतान करने के बाद शेष बकाया राशि के एवज में आरोपी ने करीब 22.81 लाख रुपये के चेक दिए थे, जो बैंक में प्रस्तुत करने पर अनादरित (रिटर्न) हो गए थे।
इसके बाद आदिशभाई जैन ने अधिवक्ता निमेष पी. दलाल के माध्यम से सूरत कोर्ट में चेक रिटर्न की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की सुनवाई के दौरान ही फरियादी आदिशभाई जैन का निधन हो गया। हालांकि उनके पुत्र मेहुल जैन ने हिम्मत नहीं हारते हुए वारिस के रूप में अदालत से केस आगे चलाने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
मामले में दोनों पक्षों की दलीलों, दस्तावेजी साक्ष्यों और प्रस्तुत प्रमाणों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी दिनेश तलरेजा को चेक बाउंस के चार मामलों में दोषी करार दिया। कोर्ट ने आरोपी को एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाते हुए चेक की पूरी राशि ब्याज सहित फरियादी के पुत्र को अदा करने का आदेश दिया।
अपने निर्णय में अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि फरियादी की मृत्यु होने से कर्ज अथवा कानूनी देनदारी स्वतः समाप्त नहीं होती और उत्तराधिकारी को न्याय पाने का पूर्ण अधिकार है।

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