दादागुरुदेव जिनदत्तसूरिजी चादर महोत्सव 6 से 8 मार्च तक जैसलमेर में, गुजरात से सैकड़ों श्रद्धालु होंगे शामिल

सूरत/जैसलमेर। स्वर्णनगरी के नाम से प्रसिद्ध राजस्थान के जैसलमेर नगर में जैन समाज का भव्य एवं ऐतिहासिक दादागुरुदेव जिनदत्तसूरिजी चादर महोत्सव 6, 7 एवं 8 मार्च 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस आध्यात्मिक महाकुंभ में सूरत, अहमदाबाद सहित गुजरात से सैकड़ों गुरुभक्त भाग लेने जैसलमेर पहुंचेंगे।
महोत्सव में जिनशासन के प्रथम दादागुरुदेव, युगप्रधान श्री जिनदत्तसूरिजी की चादर, चोलपट्टा एवं मुखपट्टी के सार्वजनिक दर्शन एवं अभिषेक का विशेष आयोजन किया जाएगा। दादागुरुदेव श्री जिनदत्तसूरिजी ने समाज सुधार, धर्म प्रचार तथा कुरीतियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी तथा प्रभु महावीर स्वामी के पश्चात एक साथ 1200 दीक्षाएं दिलाने एवं लगभग 1,30,000 अजैनों को जैन धर्म से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया था।
यह महोत्सव पूज्य युगदिवाकर, अवंती-गुणियाजी तीर्थोद्वारक, खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणप्रभसूरीश्वरजी महाराज साहेब की पावन निश्रा में आयोजित होगा। कार्यक्रम के स्वप्नदृष्टा खरतरगच्छाचार्य श्री जिनमनोज्ञसूरीश्वरजी महाराज साहेब हैं। साथ ही खरतरगच्छाचार्य श्री जिनपूर्णानंदसागरसूरिजी महाराज साहेब सहित विभिन्न गच्छों एवं परंपराओं के लगभग 350 से 400 संत-महात्मा महोत्सव में पधारेंगे।
अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद (KYUP) सूरत शहर शाखा के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय प्रचार-प्रसार सह संयोजक अल्पेश छाजेड़ ने बताया कि देशभर में इस महोत्सव को लेकर व्यापक उत्साह है और तैयारियां अंतिम चरण में हैं। चादर महोत्सव समिति के अध्यक्ष एवं महाराष्ट्र कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा तथा संयोजक एवं जीतो के पूर्व चेयरमैन तेजराज गुलेच्छा के मार्गदर्शन में आयोजन किया जा रहा है।
महोत्सव का उद्घाटन 6 मार्च को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत की विशेष उपस्थिति में होगा। 7 मार्च को समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सांस्कृतिक एकात्मता एवं सामाजिक समरसता का संदेश देने हेतु विश्वभर में एक साथ 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालुओं द्वारा संकटमोचन “दादा गुरुदेव इकतीसा” का सामूहिक पाठ किया जाएगा। देश-विदेश के श्रद्धालु निर्धारित समय पर जुड़कर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करेंगे। इस आयोजन में जैन संस्थाओं के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिन्दू परिषद, विद्या भारती सहित अनेक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि सहभागी बनेंगे।
महोत्सव के तीसरे दिन 8 मार्च को पूज्य अध्यात्मयोगी उपाध्याय प्रवर श्री महेन्द्रसागरजी म.सा. को आचार्य पदवी तथा साध्वी श्री सुभद्राश्रीजी को गणिनी पदवी प्रदान की जाएगी।
आयोजकों के अनुसार इस महा महोत्सव में देश-विदेश से 20,000 से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित अनेक गणमान्य अतिथियों के भी कार्यक्रम में उपस्थित रहने की संभावना है।
7 एवं 8 मार्च को “भारत की सांस्कृतिक एकात्मता एवं सामाजिक समरसता में दादागुरुदेव परंपरा का योगदान” विषय पर राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी भी आयोजित होगी, जिसमें जोधपुर विश्वविद्यालय, राजस्थान विश्वविद्यालय तथा प्राकृत भारती संस्थान सहित प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान नॉलेज पार्टनर के रूप में सहभागी बनेंगे।
विश्वव्यापी इकतीसा पाठ के अंतर्गत 7 मार्च को सुबह 11:30 से 12:30 बजे तक सूरत की 400 वर्ष से अधिक प्राचीन एवं चमत्कारिक श्री जिनदत्तसूरि दादावाड़ी (हरिपुरा दादावाड़ी) में पूज्य साध्वीजी भगवंत की निश्रा में सामूहिक पाठ आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा पाल, पर्वत पाटिया सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर भी श्रद्धालु सामूहिक पाठ करेंगे।
अल्पेश छाजेड़ ने बताया कि दादागुरुदेव श्री जिनदत्तसूरिजी के देहावसान के समय अग्नि संस्कार में उनकी काया भस्म हो गई थी, किंतु उनके द्वारा धारण किए गए चादर, चोलपट्टा एवं मुखपट्टी अक्षत रहे थे। इसी ऐतिहासिक एवं चमत्कारिक विरासत के दर्शन, पूजन, आराधना, भक्ति कार्यक्रम एवं विराट शोभायात्रा महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगा।
यह ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महोत्सव समाज में धर्म, संयम, अहिंसा एवं सदाचार का संदेश प्रसारित करेगा तथा सामाजिक एकता और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करेगा




