श्री स्वामिनारायण मंदिर सरथाणा, सूरत का 17वां पाटोत्सव आनंद और उत्साह के साथ सम्पन्न

सूरत। मणिनगर श्री स्वामिनारायण गादी संस्थान संचालित श्री स्वामिनारायण मंदिर, सरथाणा (सूरत) का 17वां पाटोत्सव प्रवर्तमान आचार्यश्री जितेंद्रियप्रियदासजी स्वामीजी महाराज की अध्यक्षता में अत्यंत श्रद्धा, आनंद और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पारायण की महापूजा, ‘जीवनप्राण श्री अबजीबापाश्री की बातें’ का सामूहिक पारायण, भक्ति संगीत, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले बच्चों का सम्मान तथा आचार्यश्री के दिव्य आशीर्वाद जैसे अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः मंगला आरती के दर्शन से हुआ। इस दौरान श्री घनश्याम महाराज का षोडशोपचार पूजन-अर्चन किया गया। संतों और भक्तों द्वारा भावपूर्वक तैयार अन्नकूट अर्पित किया गया तथा उपस्थित श्रद्धालुओं ने आरती का लाभ लिया।
इस अवसर पर आचार्यश्री जितेंद्रियप्रियदासजी स्वामीजी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि संतों और भक्तों में गुण देखने वाला व्यक्ति सदैव आनंद की अनुभूति करता है और प्रतिदिन सत्संग में प्रगति करता है, जबकि अवगुण देखने वाला व्यक्ति दुख और अशांति में रहता है। उन्होंने कहा कि भगवान को प्रसन्न करने के भाव से की गई सेवा ही सच्चा आनंद देती है, जबकि केवल लोगों को खुश करने के लिए की गई सेवा क्षणिक मान-सम्मान तो दिलाती है, पर स्थायी सुख नहीं देती। इसलिए किसी भी सेवा को छोटा-बड़ा समझे बिना सच्चे भाव से करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, साहित्य, खेलकूद सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त करने वाले बच्चों और युवाओं को आचार्यश्री के करकमलों से सम्मानित किया गया। दो दिवसीय इस धार्मिक आयोजन में सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद, भरूच, मुंबई सहित विभिन्न क्षेत्रों तथा विदेश से आए संतों और भक्तों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।




