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पारिवारिक व सामाजिक जीवन में वाणी संयम जरूरी – उपासक अर्जुन मेड़तवाल

*वसई (मुंबई) में पर्युषण पर्व पर विशाल श्रावक समुदाय का संबोधन*

वसई।महातपस्वी युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की आज्ञा से उपासक द्वय श्री अर्जुनजी मेड़तवाल एवं श्री गेहरीलालजी बाफना के निर्देशन में वसई (मुंबई) में पर्युषण पर्व की आराधना उत्साहपूर्वक संपन्न हो रही है।

तृतीय दिवस सामायिक दिवस पर उपासक श्री अर्जुनजी मेड़तवाल ने सामायिक को आत्मस्थित होने का श्रेष्ठ साधन बताते हुए अभिनव सामायिक का प्रयोग करवाया। उन्होंने कहा कि सामायिक पापों से दूर रखने वाला अमोघ उपक्रम है। सहयोगी उपासक श्री गेहरीलालजी बाफना ने इसे हर व्यक्ति के लिए सहज साधना बताते हुए कहा कि सामायिक अनुकूल–प्रतिकूल हर स्थिति में समभाव सिखाती है।

चतुर्थ दिवस वाणी संयम दिवस पर उपासक श्री अर्जुनजी मेड़तवाल ने कहा कि वाणी का असंयम संबंधों को तोड़ देता है, जबकि संयमित वाणी परिवार व समाज में मधुरता व सफलता लाती है। सहयोगी उपासक श्री गेहरीलालजी बाफना ने कहा कि जिह्वा जोड़ने और तोड़ने का कार्य करती है। शहद से भी मीठी वाणी कठिन से कठिन कार्य को सरल बना देती है। इसलिए हमें सदैव मीठा बोलने का अभ्यास करना चाहिए।

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