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1 अक्टूबर से IMS में बड़े बदलाव, जीएसटी पोर्टल पर नई एडवाइजरी जारी

हर इनवॉइस पर Accept या Reject का विकल्प अनिवार्य, क्रेडिट-डेबिट नोट्स पर नई व्यवस्था लागू

सूरत। सरकार ने जीएसटी पोर्टल पर इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (IMS) में बड़े बदलावों की घोषणा की है, जो 1 अक्टूबर 2025 से लागू होंगे। इन बदलावों के तहत करदाताओं और व्यवसायियों को अब इनवॉइस तथा क्रेडिट-डेबिट नोट्स के मिलान की नई प्रक्रिया अपनानी होगी।

पहला बदलाव – अब तक IMS में दर्ज सभी इनवॉइस सीधे GSTR-2B में परिलक्षित हो जाते थे और करदाता को अलग से कोई कार्रवाई नहीं करनी पड़ती थी। लेकिन नए नियम के तहत अब प्रत्येक बिल पर करदाता को Accept या Reject का विकल्प चुनना अनिवार्य होगा। केवल Accept किए गए बिल ही GSTR-2B में शामिल होंगे।

दूसरा बदलाव – पहले क्रेडिट और डेबिट नोट्स को Pending में रखने का विकल्प नहीं था। अब यह सुविधा उपलब्ध होगी। मासिक रिटर्न फाइल करने वालों के लिए Pending की समयसीमा 1 महीना और त्रैमासिक रिटर्न फाइल करने वालों के लिए 3 महीने तय की गई है।

तीसरा बदलाव – IMS में अब Remarks Column भी जोड़ा जाएगा। किसी भी क्रेडिट या डेबिट नोट को Reject करते समय करदाता को कारण दर्ज करना होगा। इससे संबंधित पार्टी को सीधे पोर्टल पर यह सूचना मिल जाएगी कि बिल किस वजह से अस्वीकृत किया गया है।

सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था अधिक पारदर्शिता और करदाताओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगी। हालांकि, शुरुआती समय में नए प्रोसेस को समझने और अपनाने में दिक्कतें आ सकती हैं।

टैक्स कंसल्टेंट नारायण शर्मा के अनुसार, “यह कदम व्यवसाय जगत में अनुशासन और स्पष्टता लाएगा। करदाताओं को चाहिए कि वे समय रहते नए नियमों की बारीकियां समझ लें, ताकि आगे किसी प्रकार की परेशानी न हो।”

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