
नई दिल्ली/सूरत। देशभर के करोड़ों टेक्सटाइल व्यापारियों, कारीगरों और एमएसएमई उद्यमियों से जुड़े वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही जीएसटी दरों की असमानता और टैक्स जटिलताओं को दूर करने की माँग एक बार फिर तेज़ हो गई है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की टेक्सटाइल एंड गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा ने इस विषय को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को एक विस्तृत पत्र भेजा है, जिसमें आगामी 56वीं जीएसटी परिषद बैठक में टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़ी तीन प्रमुख माँगों को शामिल करने की अपील की गई है।
पत्र में प्रस्तावित मुख्य माँगें इस प्रकार हैं:
1. रेडीमेड गारमेंट्स पर एक समान 5% जीएसटी दर लागू की जाए, चाहे वस्त्र का मूल्य 1000 रुपये से कम हो या अधिक। इससे दरों में असमानता दूर होगी और व्यापारी वर्ग को कर जटिलताओं से राहत मिलेगी।
2. अनस्टिच्ड फैब्रिक जैसे लेहंगा कट, ड्रेस मटेरियल आदि को स्पष्ट रूप से “फैब्रिक” की श्रेणी में रखा जाए तथा उन पर 5%जीएसटी दर ही लागू हो। इससे राज्यों द्वारा की जा रही गलत व्याख्याओं, अनावश्यक रेड और नोटिस जैसी कार्रवाइयों पर रोक लगेगी।
3. जीएसटी ढांचे को सरल, स्पष्ट एवं व्यावसायिक दृष्टिकोण से व्यवहारिक बनाया जाए, जिससे व्यापारी वर्ग टैक्स भ्रम, विवाद एवं कानूनी उलझनों से मुक्त होकर निर्बाध रूप से व्यापार कर सके।
श्री चम्पालाल बोथरा ने कहा कि जीएसटी लागू हुए 7 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन रेडीमेड और अनस्टिच्ड वस्त्रों पर दरों की अस्पष्टता आज भी व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए गंभीर समस्या बनी हुई है। टेक्सटाइल जैसे परंपरागत और रोजगारपरक क्षेत्र को राहत देना अब अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित बदलावों से सरकार को राजस्व में दीर्घकालिक वृद्धि, व्यापारिक पारदर्शिता और एमएसएमई सशक्तिकरण जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी गति मिलेगी।
कैट टेक्सटाइल एंड गारमेंट कमेटी को विश्वास है कि वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण एवं जीएसटी परिषद इस मुद्दे को प्राथमिकता देते हुए देशभर के लाखों कपड़ा व्यापारियों, निर्माताओं और उद्यमियों को व्यावहारिक समाधान प्रदान करेंगी।