भगवान भोग नहीं, भक्त का भाव चाहते हैं : परम पूज्य हनुमान बाबा
श्री नरसी चरित्र कथा में निष्काम भक्ति और भगवान के सुमिरन का दिया संदेश

सूरत। श्री ओम नंदेश्वर महादेव गौशाला परिवार, लाडली की ओर से माहेश्वरी भवन (राधिका कुंज), सिटी लाइट में आयोजित तीन दिवसीय श्री नरसी चरित्र कथा के प्रथम दिन परम पूज्य स्वामी श्री राजेंद्र दास देवाचार्य जी महाराज के कृपापात्र शिष्य परम पूज्य हनुमान बाबा (बरसाना) ने भक्त शिरोमणि नरसी के जीवन प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को अनन्य भक्ति का संदेश दिया।
हनुमान बाबा ने कहा कि भगवान भोग के नहीं, बल्कि भक्त के भाव के भूखे हैं। मनुष्य का वास्तविक कल्याण केवल भगवान के भजन, सुमिरन और निष्काम भक्ति से ही संभव है। उन्होंने कहा कि सच्चा वैष्णव वही है, जिसके जीवन में दया, दान और संयम के गुण हों। भक्त शिरोमणि नरसी इन सभी गुणों से संपन्न ब्रह्मज्ञानी संत थे और उनके रोम-रोम में श्रीकृष्ण का वास था।
उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति वही है, जिसमें भक्त हर जीव में अपने इष्ट के दर्शन करे। नरसी जी गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी पूर्ण विरक्त थे और विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान के भजन से कभी विचलित नहीं हुए। कथा के दौरान ब्रज और बरसाना की आध्यात्मिक महिमा का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया।
‘आसरो श्याम जू आपनो चरणों की’, ‘जय-जय राधा’ और ‘मेरो बरसानो निज सुख धाम’ जैसे भजनों की प्रस्तुति से पूरा पंडाल भक्तिरस में डूब गया।
आयोजक पंकज मूंदड़ा एवं विकास धूत ने बताया कि श्री नरसी चरित्र कथा का आयोजन 9 अगस्त तक प्रतिदिन दोपहर 3 से शाम 6 बजे माहेश्वरी भवन (राधिका कुंज), पहली मंजिल, सिटी लाइट, सूरत में होगा। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से कथा में उपस्थित होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने की अपील की।




