
नई दिल्ली/सूरत। देश में ईंधन बचत और संसाधनों के संयमित उपयोग को लेकर की गई अपील को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी निर्णय लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि वैश्विक परिस्थितियों और कच्चे तेल की संभावित कमी को ध्यान में रखते हुए अब वे किसी भी सरकारी अथवा निजी कार्यक्रम में पायलटिंग या एस्कॉर्ट वाहनों का उपयोग नहीं करेंगे। इस निर्णय को उन्होंने तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया है।
राष्ट्रहित में पेट्रोल-डीजल बचत का संदेश
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ईंधन की बचत करना प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक और जनप्रतिनिधि का नैतिक कर्तव्य है। एस्कॉर्ट वाहनों के काफिले को समाप्त करने से पेट्रोल और डीजल की बचत होगी, साथ ही सरकारी खर्च में भी कमी आएगी। उनका मानना है कि छोटे-छोटे निर्णय भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से ईंधन बचाने और मितव्ययिता अपनाने की अपील के प्रति त्वरित प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि जब देश संसाधनों के संतुलित उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रहा हो, तब जनप्रतिनिधियों को स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।
अन्य राज्यों और मंत्रियों के लिए प्रेरणादायी पहल
सी.आर. पाटिल के इस निर्णय को प्रशासनिक क्षेत्र में एक प्रेरणादायी पहल माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे विभिन्न राज्यों के मंत्री, जनप्रतिनिधि तथा वरिष्ठ अधिकारी भी अनावश्यक खर्च कम करने और ईंधन बचत की दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित होंगे।
उन्होंने पहले भी ‘जल शक्ति’ और ‘कैच द रेन’ जैसे अभियानों को जनआंदोलन का रूप देने में सक्रिय भूमिका निभाई है और अब ईंधन बचत के संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इस निर्णय से आम नागरिकों में भी सकारात्मक संदेश गया है कि जब नेतृत्व स्वयं त्याग करता है, तभी समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव होता है।



