सामाजिक/ धार्मिकसूरत सिटी

गोपीपुरा में आचार्य पद्मदर्शनसूरि जी का प्रवचन

वडीलों का अनादर दुखों को देता है न्योता, जीवन में अति से बचने की दी सीख

सूरत: गोपीपुरा स्थित आचार्य श्री ओंकारसूरिजी आराधना भवन में जैनाचार्य पूज्य पद्मदर्शनसूरि जी महाराज आदि श्रमण भगवंतों का पावन आगमन हुआ। इस पावन अवसर पर धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अपने प्रवचन में पूज्य आचार्य पद्मदर्शनसूरि जी महाराज ने कहा कि वडीलों का अनादर जीवन में दुखों को आमंत्रण देता है। छोटी उम्र में बिना समझ के मिली संपत्ति और सम्मान व्यक्ति के भीतर दोषों का संग्रह कर देते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कपड़े, जूते और भोजन माप में हों तो ही उपयोगी होते हैं, उसी प्रकार जीवन में भी संतुलन आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में अति होने पर जीवन में भारी उथल-पुथल आ जाती है। सत्ता, संपत्ति या सौंदर्य—यदि सीमित और संतुलित न हो, तो कभी भी विपत्तियां खड़ी हो सकती हैं।
आचार्यश्री ने आगे कहा कि यदि जीवन में शांति, सुख और समाधि चाहिए तो मन के साथ समझौता करना सीखना होगा। मन को मारना नहीं, बल्कि मन को मनाना चाहिए। यदि मन को दबाया जाएगा तो वह स्प्रिंग की तरह उछल पड़ेगा। इसलिए मन को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि आप प्रभु के साथ हैं, तो पूरा विश्व आपके साथ होता है। यह अमूल्य मानव जीवन केवल खाने-पीने और मौज-मस्ती में बिताने के लिए नहीं है, बल्कि इसे ईश्वर से जोड़कर सार्थक बनाना चाहिए।
आचार्यश्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि आज समाज में भौतिकता की ओर तेज़ प्रवाह है, जिससे जीवन कभी भी अस्थिर हो सकता है। आत्मोन्नति के लिए अध्यात्म का संगीत जीवन में उतरना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि प्रभु हमारे जीवन का सुरक्षा चक्र हैं। यदि ईश्वर की शक्ति साथ हो, तो कोई भी ताकत जीवन को डगमगा नहीं सकती। जीवन ऐसा जीना चाहिए कि दूसरों को भी उससे प्रेरणा और सहारा मिल सके।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button