पाल स्थित ‘वीर अमंता’ अपार्टमेंट के गिरनार मंडल श्री नेमिनाथ जिनालय में पंचकल्याणक महोत्सव हर्षोल्लास से जारी

सूरत। पाल क्षेत्र स्थित ‘वीर अमंता’ अपार्टमेंट के गिरनार मंडल श्री नेमिनाथ जिनालय में पारेख परिवार द्वारा आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव वैराग्यवारिधि जैनाचार्य कुलचन्द्रसूरिजी महाराज सहित छह सूरिवरों की पावन निश्रा में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हो रहा है।
बुधवार सुबह परमात्मा के ऊपर मुमुक्षुओं द्वारा पुष्पवृष्टि एवं कुसुमांजलि का भव्य और भावपूर्ण अनुष्ठान किया गया। इस अवसर पर जैनाचार्य पद्मदर्शनसूरिजी महाराज ने प्रवचन में कहा कि पुष्प की दो विशेषताएं होती हैं—कोमलता और सुगंध। उन्होंने बताया कि जीवन में भी कठोरता का त्याग कर कोमल बनना आवश्यक है, क्योंकि कठोरता से रिश्तों में दूरियां बढ़ती हैं—दोस्त दुश्मन बन जाते हैं, अपने पराए हो जाते हैं और परिवार, समाज व राष्ट्र में संबंधों की मधुरता समाप्त हो जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार और व्यवहार—दोनों क्षेत्रों में कोमलता अत्यंत आवश्यक है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज वैश्विक स्तर पर भी यह अनुभव किया जा रहा है कि दुनिया में नेतृत्व और स्वीकार्यता के लिए मृदुता जरूरी है। जीवन को सुगंधित बनाना है तो आचार-सदाचार अपनाना होगा, क्योंकि इत्र या परफ्यूम की खुशबू से भी अधिक महत्त्व शील और सदाचार की सुगंध का है।
पंचकल्याणक के अंतर्गत प्रभु नेमिनाथ के जीवन के विभिन्न प्रसंगों—नामकरण, पाठशाला गमन, मामा घर आगमन, विवाह प्रसंग और राज्याभिषेक—की भव्य प्रस्तुति की गई। इन दृश्यों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया और अनेक लोगों की आंखें नम हो गईं। बताया गया कि वीतराग परमात्मा के जीवन में विवाह जैसे प्रसंग भी चारित्र मोहनीय कर्म के कारण आते हैं।
इन मंच प्रस्तुतियों के माध्यम से प्राचीन राजव्यवस्था की महानता भी स्पष्ट हुई, जहां सिद्धांत था—“दुष्टस्य दंडः, सुजनस्य सेवा” अर्थात दुष्ट को दंड और सज्जन को सम्मान। आज के समय में सज्जनों को हाशिये पर और दुर्जनों को प्रशंसा मिल रही है—यह चिंतन का विषय है। प्रवचन में यह संदेश दिया गया कि प्रभु के जीवन प्रसंगों से जीवन परिवर्तन, विचार परिवर्तन और हृदय परिवर्तन का प्रयास करना चाहिए।



