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पुष्प की भांति हमारे जीवन में भी कोमलता और शील की सुगंध होनी चाहिए : पू. पद्मदर्शनसूरिजी

पाल में श्रुतज्ञान महोत्सव समिति द्वारा आयोजित निशीथ ग्रंथ संदर्भित पंचदिवसीय महोत्सव का भव्य शुभारंभ

सूरत (पाल)। पाल स्थित श्रुतज्ञान महोत्सव समिति द्वारा आयोजित निशीथ ग्रंथ के संदर्भ में पाँच दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ श्रमण–श्रमणी भगवंतों की पावन निश्रा में श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में हुआ। वैराग्य वारिधि पूज्य आचार्य श्री कुलचंद्रसूरिजी महाराज सहित छह आचार्य भगवंतों एवं पदस्थ श्रमण–श्रमणी वृंद की पावन उपस्थिति में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
महोत्सव के आरंभ में पूज्य भगवंतों का भव्य सामैया किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में गुरुभक्तों ने सहभागिता की। श्रुतज्ञान नगरी का अनावरण लाभार्थी परिवार द्वारा किया गया। इस अवसर पर शंखेश्वर पार्श्वनाथ बावन जिनालय की भव्य और आकर्षक प्रतिकृति भी तैयार की गई है।
पहले दिन पंचधा भक्ति का संगीतमय आयोजन
प्रथम दिन पंचधा भक्ति का सुंदर संगीतमय आयोजन किया गया। पूज्य आचार्य श्री कुलचंद्रसूरिजी महाराज ने मांगलिक का पावन वाचन किया। कार्यक्रम का संचालन प्रीत और मीत शाह ने किया। गीत, नृत्य, वाद्य, पुष्प और आरती के माध्यम से पंचधा भक्ति की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई।
दोपहर में बहनों की सांजी, सायंकाल मैपिंग शो तथा प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर मनीषभाई वघासिया का प्रेरणादायी व्याख्यान आयोजित हुआ। उन्होंने स्नेह, सहयोग और संस्कारों पर प्रभावशाली विचार रखे और कहा कि जब परिवार टूट रहे हैं, तब परिवार प्रेम को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। हजारों श्रोताओं ने उनके विचारों को सराहा।
आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा
29 तारीख की सुबह 500 आचार्यों का पूजन होगा। दोपहर में व्यसन एवं फैशन मुक्ति तथा अंतरजातीय विवाह विषय पर आईएएस कुमारी विभाबेन पारेख द्वारा 15 से 50 वर्ष की बहनों के लिए विशेष सेमिनार आयोजित किया जाएगा। सायंकाल 7 बजे टैलेंट शो का आयोजन होगा।
इस पावन अवसर पर आचार्य श्री वरबोधिसूरिजी म., आचार्य श्री पद्मदर्शनसूरिजी म., आचार्य श्री मलयकीर्तिसूरिजी म., आचार्य श्री पद्मबोधिसूरिजी म. एवं आचार्य श्री रश्मिराजसूरिजी म. सहित पदस्थ श्रमण–श्रमणी वृंद ने पावन निश्रा प्रदान की।
पू. पद्मदर्शनसूरिजी का प्रेरक संदेश
पंचधा भक्ति के अवसर पर पूज्य आचार्य श्री पद्मदर्शनसूरिजी महाराज ने कहा कि प्रभु भक्ति अर्पण और समर्पण से होती है। जैसे पुष्प में कोमलता और सुगंध होती है, वैसे ही हमारे जीवन में भी कोमलता और शील की सुगंध होनी चाहिए। आरती जीवन की अरिष्टताओं को दूर करने का माध्यम है। संगठन और संकल्प को सुदृढ़ बनाने के लिए आरती का विशेष महत्व है। देवों के समक्ष दीप प्रज्वलन से आनंद की अनुभूति होती है। आरती एकता का प्रतीक है और विघ्नों के नाश के लिए की जाती है। नृत्य, गीत और वाद्य के माध्यम से की गई भक्ति से अनेक समस्याओं का समाधान संभव है

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