आत्म-ध्यान द्वारा ही विश्व शांति सम्भव – आचार्य सम्राट पूज्य श्री शिवमुनि जी म.सा.
वर्ष 2026 ‘आत्म-ध्यान वर्ष’ घोषित

सूरत/बलेश्वर।नूतन वर्ष 2026 के मंगल प्रभात पर अवध संगरीला बलेश्वर सूरत स्थित आत्म भवन के प्रांगण में श्रमण संघीय चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट पूज्य श्री शिवमुनि जी म.सा. के पावन सान्निध्य में भव्य नववर्ष मंगलपाठ का आयोजन सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर सूरत सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहीं।
आचार्य भगवन् ने इस अवसर पर वर्ष 2026 को ‘आत्म-ध्यान वर्ष’ घोषित करते हुए कहा कि नववर्ष केवल कैलेंडर की तारीख बदलने का नाम नहीं, बल्कि आत्म-चिंतन, आत्म-शुद्धि एवं आत्म-विकास का अवसर है। उन्होंने कहा कि सच्चा सुख बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि आत्मा की साधना और शुद्ध आचरण में निहित है।
अपने मंगल आशीर्वचन में आचार्य श्री जी ने कहा कि आज विश्व में अनेक प्रकार के ध्यान प्रचलित हैं, किंतु आत्म-ध्यान भगवान महावीर स्वामी की साधना का सार है, जो व्यक्ति का आमूल-चूल परिवर्तन कर देता है। संसार में जीव और अजीव दो ही तत्त्व हैं, किंतु मनुष्य अधिकांश समय अजीव के पोषण में व्यतीत कर देता है, जबकि उसके भीतर स्थित अजर-अमर आत्मा का ध्यान ही मोक्ष का मार्ग है।

आचार्य भगवन् ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों की ओर संकेत करते हुए कहा कि चारों ओर युद्ध और अशांति के बादल मँडरा रहे हैं। ऐसे समय में प्रभु महावीर की अहिंसा, करुणा और मैत्री की वाणी का विश्व में प्रसार ही स्थायी शांति का मार्ग है। उन्होंने कहा कि आत्म-ध्यान से ही विश्व में आनंद, ज्ञान और शांति संभव है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रवचन प्रभाकर श्री शमित मुनि जी, मधुर गायक श्री निशांत मुनि जी एवं श्री शाश्वत मुनि जी ने भजन एवं उद्बोधन प्रस्तुत किए। पंचकुला से आयी बालिका जिनाज्ञा जैन ने भजन के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
शिवाचार्य आत्म-ध्यान फाउंडेशन की ओर से उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के लिए भोजनशाला में भोजन व्यवस्था की गई। कार्यक्रम का संचालन श्री रोहित जैन ने किया। समापन अवसर पर आचार्य भगवन् ने समस्त श्रद्धालुओं को विश्व शांति हेतु नववर्ष मंगलपाठ का श्रवण कराया।




