व्यभिचार के आरोपों के बावजूद पति को 21,000 रुपये मासिक भरण-पोषण देने का आदेश
सिर्फ आरोप के आधार पर भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता: सूरत फैमिली कोर्ट

सूरत। पत्नी पर व्यभिचार के गंभीर आरोप लगाए जाने के बावजूद, केवल आरोपों के आधार पर उसे और उसके बच्चों को भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता। पर्याप्त सबूतों के अभाव में सूरत की फैमिली कोर्ट ने पत्नी और दो नाबालिग बच्चों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
फैमिली कोर्ट ने पति को पत्नी को 5,000 रुपये तथा दो नाबालिग बच्चों को क्रमशः 8,000 और 8,000 रुपये, इस प्रकार कुल 21,000 रुपये मासिक भरण-पोषण (खोराकी-पोषाकी) देने का आदेश दिया है।
मामले की संक्षिप्त पृष्ठभूमि के अनुसार, पति-पत्नी के बीच विवाद के बाद पत्नी और दोनों बच्चों को उचित आर्थिक सहारा नहीं मिल रहा था। ऐसे में पत्नी ने अपने अधिवक्ता एडवोकेट शमीम मलेक के माध्यम से फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण की याचिका दायर की थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करते हुए यह फैसला सुनाया।
मामले में (नाम परिवर्तित)मीना बेन ने अपने पति अमर भाई के विरुद्ध भरण-पोषण की मांग की थी। रक्षाबेन के दो नाबालिग बच्चे हैं, जिनकी उम्र क्रमशः 8 वर्ष और 6 वर्ष है।
याचिका में पत्नी ने बताया कि पति की मासिक आय लगभग 70,000 रुपये है और पत्नी व बच्चों के अलावा उस पर कोई अन्य बड़ी जिम्मेदारी नहीं है। वहीं, पत्नी वर्तमान में अपने माता-पिता पर निर्भर है। दोनों बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, जिस पर लगभग 10,000 रुपये प्रतिमाह खर्च होता है। इसके अलावा एक बच्चे का इलाज भी जारी है।
इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फैमिली कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस प्रमाण के लगाए गए आरोपों के आधार पर पत्नी और बच्चों को भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता, और पति को उनकी जिम्मेदारी निभानी होगी।



