दिवाली आध्यात्मिक,सांस्कृतिक औऱ सामाजिक सेतु- प्रवीण खंडेलवाल
यूनिस्को द्वारा दीवाली को वर्ल्ड हेरिटेज फेस्टिवल घोषित किये जाने पर बोले प्रवीण खंडेलवाल

यूनिस्को द्वारा दिवाली को वर्ल्ड हेरिटेज फेस्टिवल घोषित किए जाने पर CAIT के नेशनल सेक्रेटरी जनरल प्रवीण खंडेलवाल का बयान
सूरत/ दिल्ली।यूनिस्को द्वारा दिवाली को इंटैन्जिबल कल्चरल वर्ल्ड हेरिटेज फेस्टिवल के रूप में मान्यता देना भारत सहित दुनिया भर में इस पर्व को मनाने वाले लाखों लोगों के लिए अत्यंत गौरव का क्षण है। यह निर्णय दिवाली के उस सार्वभौमिक संदेश की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है, जिसमें सत्य की असत्य पर विजय, ज्ञान की अज्ञान पर विजय और प्रकाश की अंधकार पर विजय निहित है।
प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि दिवाली मात्र एक त्योहार नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक सेतु है, जो विश्वभर के समुदायों को जोड़ने का कार्य करती है। यह घोषणा भारत की प्राचीन सभ्यता, समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक चेतना को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाती है।उन्होंने कहा कि एक भारतीय, एक पब्लिक रिप्रेजेंटेटिव और हमारी सांस्कृतिक धरोहर के गर्वित संरक्षक के रूप में वह यूनिस्को के इस फैसले का हार्दिक स्वागत करते हैं। यह कदम विश्वभर में फैले भारतीय प्रवासियों और भारत की सांस्कृतिक विरासत के वैश्विक प्रभाव को सम्मानित करता है।
CAIT गुजरात के चेयरमैन प्रमोद भगत का वक्तव्य प्रमोद भगत ने कहा कि इस वैश्विक पहचान से भारत की सॉफ्ट पावर और सुदृढ़ होगी, साथ ही इंटरनेशनल कल्चरल डिप्लोमेसी को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा। इससे दुनिया में भारतीय त्योहारों, मान्यताओं और सांस्कृतिक नीतियों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।उन्होंने यह भी कहा कि दिवाली से जुड़े देशभर के कारीगरों, शिल्पकारों, व्यापारियों और छोटे व्यवसायों को इस मान्यता से नई ऊर्जा और उत्साह प्राप्त होगा।अंत में, दोनों नेताओं ने कहा कि आज भारत विश्व मंच पर पहले से अधिक उज्ज्वल रूप से चमक रहा है, और दिवाली वास्तव में पूरी मानवता का त्योहार बन चुकी है।”




