
सूरत। हाल ही में सूरत में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित व्यापारियों को राहत पहुंचाने के लिए राज्य सरकार की ‘सूरत फ्लड रिलीफ स्कीम’ के तहत बड़ी राहत दी गई है। यदि किसी व्यापारी के पास बाढ़ से हुए नुकसान के फोटो या वीडियो उपलब्ध नहीं हैं, तो ऐसे मामलों में दक्षिण गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SGCCI) अथवा संबंधित सर्विस सोसायटी, को-ऑपरेटिव सोसायटी या व्यापारी एसोसिएशन द्वारा जारी प्रमाणपत्र को वैध साक्ष्य माना जाएगा।
कलेक्टर कार्यालय में जिला उद्योग केंद्र (DIC) के महाप्रबंधक की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में दक्षिण गुजरात की प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी तथा चैंबर के अध्यक्ष अशोक जीरावाला और पूर्व अध्यक्ष आशीष गुजराती सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में राहत योजना की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में तय किया गया कि राहत योजना का लाभ लेने के इच्छुक व्यापारी पहले संबंधित बैंक में ऋण के लिए आवेदन करेंगे। बैंक से सेक्शन लेटर (स्वीकृति पत्र) मिलने के बाद उसे जिला उद्योग केंद्र में जमा कराया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी होगी। ऋण पर अंतिम स्वीकृति का अधिकार जिला उद्योग केंद्र के पास रहेगा।
सरकारी निर्णय के अनुसार, बाढ़ प्रभावित व्यापारियों को 30 लाख रुपये तक के ऋण पर तीन वर्ष के लिए प्रतिवर्ष 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। यदि किसी व्यापारी को 30 लाख रुपये से अधिक का ऋण स्वीकृत होता है या ऋण अवधि तीन वर्ष से अधिक होती है, तब भी ब्याज सब्सिडी अधिकतम 30 लाख रुपये तक और केवल तीन वर्ष की अवधि के लिए ही मिलेगी।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि गिरवी रखी गई संपत्ति (कोलेटरल) का मूल्य बाढ़ के कारण कुछ कम हुआ हो, तब भी बैंकों से व्यापारियों के ऋण आवेदनों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर स्वीकृति देने का आग्रह किया गया है। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि इस राहत योजना को व्यापारियों के बीमा दावों (इंश्योरेंस क्लेम) से नहीं जोड़ा जाएगा, जिससे बीमा क्लेम पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
योजना के तहत आवेदन करते समय व्यापारियों को अप्रैल, मई और जून माह के GSTR-3B की प्रतियां भी जमा करनी होंगी। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अहमदाबाद स्थित बैंकों के क्षेत्रीय कार्यालयों को शीघ्र दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि सभी बैंक शाखाओं में योजना का एक समान क्रियान्वयन हो सके और बाढ़ प्रभावित व्यापारियों को राहत का लाभ जल्द से जल्द मिल सके।




