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यार्न में पैनिक बाइंग से दूर रहें, जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करें – वीविंग संगठनों की अपील

यार्न के बढ़ते दामों के चलते वीविंग उद्योग ने उत्पादन घटाने का लिया निर्णय यार्न की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि और बाजार में मांग की कमी के कारण उत्पादन कटौती ही एकमात्र विकल्प: रैपियर जैकार्ड वीवर्स एसोसिएशन

सूरत। पिछले 10 से 12 दिनों में सूरत के टेक्सटाइल उद्योग, विशेष रूप से वीविंग (वणाट) सेक्टर में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है। ग्रे और फिनिश्ड कपड़े का उत्पादन करने वाले वीवर्स के लिए यार्न की कीमतों में अचानक 25% से 45% तक की वृद्धि हो गई है, जो गुणवत्ता के अनुसार अलग-अलग है।
स्थिति ऐसी बन गई है कि महंगे यार्न से तैयार कपड़ा बाजार में उसी अनुपात में महंगे दाम पर बेचना पड़ेगा, लेकिन खुदरा व्यापारी और ग्राहक इतनी ऊंची कीमत पर खरीदने को तैयार नहीं हैं।
इसी परिस्थिति को देखते हुए साचिन GIDC स्थित रोटरी हॉस्पिटल परिसर में आयोजित रैपियर जैकार्ड वीवर्स एसोसिएशन की बैठक में वीविंग उद्योग से जुड़े कारखानदारों ने उत्पादन में कटौती करने का निर्णय लिया।
इस बैठक में एयरजेट वीवर्स, शटललेस वीवर्स सहित वीविंग उद्योग के विभिन्न छोटे-बड़े संगठनों और सोसायटियों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए उद्योग के अग्रणियों ने बताया कि वर्तमान में वीविंग उद्योग अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है। बाजार में कपड़े की मांग कम है, श्रमिकों की कमी है और सीमित ऑर्डर के चलते कारखानों की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) भी मुश्किल से चल रही है। ऐसे समय में मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण यार्न के दामों में असामान्य वृद्धि हो गई है।
यार्न की कीमतों में इतनी वृद्धि हो चुकी है कि कपड़ा तैयार कर बेचने पर उसकी लागत निकालने के लिए पहले की तुलना में लगभग 25% अधिक कीमत रखनी पड़ेगी। हालांकि, बाजार में मांग कमजोर होने के कारण इतनी ऊंची कीमत पर कपड़ा बिक पाना संभव नहीं है, जिससे वीवर्स को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ऐसी स्थिति में बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने कारखानदारों को सलाह दी कि वे केवल ऑर्डर के अनुसार ही यार्न खरीदें। घबराहट में आकर अतिरिक्त खरीदारी या स्टॉक न करें।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पैनिक बाइंग की प्रवृत्ति बढ़ेगी, तो यार्न के दाम और अधिक बढ़ सकते हैं, जिससे उद्योग की स्थिति और गंभीर हो जाएगी।

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