सप्ताह में दो दिन बंद रखने की तैयारी: डाइंग-प्रिंटिंग मिलें भी उत्पादन कटौती के रास्ते पर
मिडिल ईस्ट युद्ध का असर सूरत के टेक्सटाइल प्रोसेसिंग उद्योग पर गहराया

सूरत। मिडिल ईस्ट में पिछले 18 दिनों से जारी युद्ध का सबसे नकारात्मक प्रभाव सूरत के टेक्सटाइल उद्योग के विभिन्न घटकों पर देखने को मिल रहा है। विशेष रूप से सूरत और आसपास के क्षेत्रों में स्थित फैब्रिक प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, डाइंग-प्रिंटिंग मिलें गंभीर संकट का सामना कर रही हैं।
इन मिलों में मुख्य ईंधन के रूप में उपयोग होने वाले कोयले के दामों में भारी उछाल आया है। साथ ही पेट्रोलियम उत्पादों से बनने वाले रंग, केमिकल्स, डाईज और अन्य कच्चे माल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। दूसरी ओर, होली के दौरान अपने गृह राज्य गए कई श्रमिक अब तक वापस नहीं लौटे हैं, जिससे श्रमिकों की कमी भी बनी हुई है।
इन सभी समस्याओं के चलते प्रोसेसिंग उद्योग की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। साचिन, पलसाना और पांडेसरा क्षेत्रों की कई मिलों में सप्ताह में दो दिन उत्पादन बंद रखने का निर्णय लागू किया जा चुका है।
डाइंग-प्रिंटिंग मिलों के अग्रणियों के अनुसार, कुछ मिलों की स्थिति इतनी खराब है कि केवल श्रमिकों को रोजगार बनाए रखने के लिए ही उत्पादन जारी रखा जा रहा है। कोयले की कीमतों में इतनी वृद्धि हो चुकी है कि वर्तमान प्रोसेसिंग दरों पर काम करने से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।बताया गया कि प्रोसेसिंग उद्योग में कोयले की आपूर्ति मुख्य रूप से इंडोनेशिया से होती है। इंडोनेशिया द्वारा कोयला उत्पादन में लगभग 35% की कटौती किए जाने से इस वर्ष सप्लाई कम हो गई है, जबकि पिछले वर्ष मांग के मुकाबले अधिक सप्लाई थी। इस असंतुलन के कारण कोयले के दामों में बेतहाशा वृद्धि हो गई है।
ऐसी स्थिति में मिल मालिक और प्रोसेसर्स अब उत्पादन घटाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कई मिलों ने सप्ताह में दो दिन काम बंद रखने का निर्णय भी लागू कर दिया है।
कामगारों की रोजगार सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील
वीविंग उद्योग के अग्रणी एवं साचिन इंडस्ट्रियल सोसायटी के सचिव मयूर गोलवाला ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में पूरे उद्योग को पूरी तरह बंद करना अधिक नुकसानदायक साबित हो सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि इस तरह उत्पादन जारी रखा जाए जिससे श्रमिकों की रोजगार सुरक्षा बनी रहे और कारखानों की वर्किंग कैपिटल के अनुरूप कार्य चलता रहे।
उन्होंने उद्योगकारों से अपील की कि पूरी तरह बंद करने की बजाय संतुलित उत्पादन नीति अपनाएं, ताकि कामगारों के सामने रोजगार का गंभीर संकट उत्पन्न न हो।



