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दान में श्रेष्ठ अभयदान, वचन में श्रेष्ठ सत्य वचन और पुरुषों में श्रेष्ठ महावीर — मुनिश्री डॉ. मदनकुमारजी

भगवान महावीर के 2625वें जन्म कल्याणक पर वेसु स्थित पुण्यभूमि अपार्टमेंट में भव्य आयोजन, बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे उपस्थित

सूरत। भगवान महावीर के 2625वें जन्म कल्याणक दिवस के अवसर पर सूरत के वेसु स्थित पुण्यभूमि अपार्टमेंट्स में आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि श्री डॉ. मदनकुमारजी के सान्निध्य में जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, सूरत एवं पुण्यभूमि क्षेत्र परिवार के संयुक्त तत्वावधान में भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति रही और श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर के संदेशों को श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
मुनि श्री डॉ. मदनकुमारजी ने अपने मंगल संबोधन में कहा कि भगवान महावीर जैन तीर्थंकर परंपरा के अंतिम तीर्थंकर थे और उनका जीवन संयम, साधना और आत्मानुशासन का सर्वोत्तम उदाहरण है। साढ़े बारह वर्षों की कठोर साधना के पश्चात उन्होंने केवलज्ञान प्राप्त किया और तप-साधना के बल पर कर्मों का क्षय कर जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति प्राप्त की। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने न केवल स्वयं मोक्ष मार्ग प्राप्त किया, बल्कि लाखों लोगों को भी मुक्ति का मार्ग दिखाया।

उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने अहिंसा को सर्वोच्च स्थान दिया और समस्त जीवों को अभयदान का संदेश दिया। शास्त्रों में भी कहा गया है कि दान में श्रेष्ठ अभयदान, वचन में श्रेष्ठ सत्य वचन और पुरुषों में श्रेष्ठ ज्ञातपुत्र महावीर हैं। मुनि श्री ने धर्म के दो स्वरूप संवर और निर्जरा का उल्लेख करते हुए बताया कि सामायिक एवं साधना से नए कर्मों का बंधन रुकता है, जबकि तप, उपवास एवं अनशन से संचित कर्मों की निर्जरा होती है। उन्होंने भगवान महावीर के अहिंसा, अनेकांत और अपरिग्रह के सिद्धांतों को आज के समय में विश्व की समस्याओं का समाधान बताया और उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर मुनि श्री संयमकुमारजी एवं मुनि श्री कल्पकुमारजी ने भी भगवान महावीर के जीवन और दर्शन पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, सूरत के अध्यक्ष हजारीमलजी भोगर ने विचार व्यक्त किए तथा महासभा के उपाध्यक्ष प्रकाशजी डाकलिया ने मधुर गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में फूलचंदजी छत्रावत, मनोज बरमेचा, निर्मल कोठारी, अनिल जीरावला सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। महिला मंडल की बहनों ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया, कार्यक्रम का संचालन उपासक अर्जुनजी मेड़तवाल ने किया तथा अंत में उपासक मिश्रीमल नंगावत ने आभार व्यक्त किया।

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