
सूरत। केंद्र सरकार के टेक्सटाइल मंत्रालय ने देश के छह प्रमुख टेक्सटाइल क्लस्टरों में सूरत का चयन ‘टेक्सटाइल एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर’ के लिए किया है। पायलट आधार पर शुरू की जा रही इस योजना में गुजरात से केवल सूरत को शामिल किया गया है, जिसे शहर की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इस फैसिलिटेशन सेंटर के जरिए सूरत को विशेष रूप से ‘टेक्निकल टेक्सटाइल’ और ‘मैन-मेड फाइबर (एमएमएफ)’ उत्पादों के हब के रूप में विकसित करने की योजना है। एक ही छत के नीचे निर्यात से जुड़ी प्रक्रियाएं, सर्टिफिकेशन और सरकारी औपचारिकताएं पूरी होने से व्यापारियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी। इससे शहर की अर्थव्यवस्था को गति मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
चैंबर ऑफ कॉमर्स के वाइस प्रेसिडेंट और फेडरेशन ऑफ गुजरात वीवर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अशोकभाई जीरावाला ने इसे सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए नई “लाइफलाइन” बताया। उन्होंने कहा कि भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ऐसे में सूरत का यह एक्सपोर्ट सेंटर देश की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
वर्तमान में सूरत में प्रतिदिन लगभग 6 करोड़ मीटर फैब्रिक का उत्पादन होता है। उद्योग जगत का अनुमान है कि बेहतर निर्यात सुविधाओं के चलते अगले पांच वर्षों में यह उत्पादन बढ़कर 10 से 12 करोड़ मीटर प्रतिदिन तक पहुंच सकता है। शहर की करीब 40 हजार टेक्सटाइल इकाइयां अब निर्यात गुणवत्ता वाले उत्पादों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।
उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, सूरत के विशेष फैब्रिक, बेडशीट, पर्दे और एमएमएफ उत्पाद अब यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों के बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी ढंग से पहुंच सकेंगे। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का लाभ भी स्थानीय निर्यातकों को मिलेगा, जिससे निर्यात में हर साल 10 से 12 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।




