पूर्व कर्मों का नाश हो मानव जीवन का लक्ष्य : मानवता के मसीहा महाश्रमण
डीडवाना से विहार कर सिंघाना में पधारे युगप्रधान आचार्यश्री

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बना पावन, विराट हिन्दू सम्मेलन का हुआ आयोजन आचार्यश्री की प्रेरणा से उपस्थित लोगों ने स्वीकार की संकल्पत्रयी आरएसएस के प्रांत प्रचारक आदि ने भी दी भावनाओं को प्रस्तुति, सिंघाना, डीडवाना-कुचामण (राजस्थान) :
डीडवाना जिला मुख्यालय को आध्यात्मिक संदेशों से आलोकित कर जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने सोमवार को प्रातःकाल की मंगल बेला में अग्रवाल भवन से गतिमान हुए। डीडवानावासियों ने मानवता के समीहा को सश्रद्धा नमन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। जनता को मंगल आशीष प्रदान करते हुए आचार्यश्री अगले गंतव्य की ओर बढ़ चले।
अपनी धवल सेना का कुशल नेतृत्व करते हुए आचार्यश्री अब धीरे-धीरे योगक्षेम वर्ष के लिए लाडनूं में स्थित जैन विश्व भारती की ओर बढ़ रहे हैं। 6 फरवरी को महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना संग जैन विश्व भारती में योगक्षेम वर्ष के लिए जैन विश्व भारती में प्रवेश करेंगे। इसे लेकर जैन विश्व भारती में मानों सभी प्रकार की तैयारियां पूर्णता की ओर हैं। लाडनूंवासी भी इस सौभाग्य को प्राप्त कर अत्यंत उत्साहित नजर आ रहे हैं।
मार्ग में आने वाले गांवों व रास्ते से गुजरने वाले लोगों को आचार्यश्री से मंगल आशीर्वाद प्राप्त हुआ। जन-जन को शुभाशीष बांटते हुए आचार्यश्री सिंघाना गांव में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पधारे। विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों व शिक्षकों आदि ने आचार्यश्री का भावभीना स्वागत किया। आज मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के साथ-साथ मानवता के मसीहा आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में सिंघाना मण्डल द्वारा विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया।
महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने समुपस्थित जनता को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि चार चीजें शास्त्र में दुर्लभ बताई गई हैं- मनुष्य जन्म का मिलना, उच्च कुल में जन्म व धर्मश्रुति, श्रद्धा के भाव का जागरण और संयम में पराक्रम करना दुर्लभ है। वर्तमान में हम सभी को मनुष्य जीवन तो प्राप्त है। आज धार्मिक बातों को सुनने का अवसर भी मिल रहा है। अब श्रद्धा का जागरण हो जाए और उसके पालन के प्रति पराक्रम भी हो जाए तो कल्याण की बात हो सकती है। आदमी को जीवन मिला है तो उसे अच्छे लक्ष्य के साथ जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को विवेकपूर्ण जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। पूर्व कर्मों का नाश करने के लिए इस देह को धारण करना चाहिए।
मनुष्य जीवन को वृक्ष मान लिया जाए तो मनुष्य जीवन रूपी वृक्ष के छह फल लगने चाहिए। उनमंे पहला बताया गया कि जिनेश्वर भगवान की भक्ति, गुरु की पर्युपासना, प्राणियों के प्रति दया का भाव, सुपात्र दान, गुणानुराग तथा आगम स्वाध्याय धर्मग्रन्थों का श्रवण। इस प्रकार यदि मनुष्य जीवन रूपी वृक्ष पर ये फल लगते हैं तो उसका जीवन सफल हो सकता है।
आचार्यश्री ने कहा कि सभी में सद्भावना हो, जीवन में नैतिकता रहे और जीवन नशामुक्त रहे। आचार्यश्री ने समुपस्थित विद्यार्थियों को सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति कीे प्रतिज्ञाओं की प्रेरणा दी तो उपस्थित लोगों व विद्यार्थियों ने इन तीनों प्रतिज्ञाओं को स्वीकार किया।
आचार्यश्री के मंगल प्रवचन से पूर्व राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत संचालक श्री हरदयालजी ने उपस्थित जनता को संबोधित किया। आचार्यश्री की मंगल प्रेरणा के उपरान्त विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्री छोटूराम भाकर ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी।




