पालीताणा में रचेगा अध्यात्म का नया इतिहास
मुनिप्रवर श्री सम्यक्रत्नसागरजी म.सा. का आचार्य पदारोहणोत्सव 11 से 13 फरवरी तक

पालीताणा (गुजरात) की पावन तीर्थभूमि पर 11 से 13 फरवरी 2026 तक तीन दिवसीय भव्य आध्यात्मिक महोत्सव ‘सुधर्म सुवास’ का आयोजन होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर युवा हृदय सम्राट एवं अध्यात्मवेत्ता मुनिप्रवर श्री सम्यक्रत्नसागरजी म.सा. का आचार्य पदारोहण विधि-विधानपूर्वक संपन्न होगा। तीर्थराज पालीताणा में आयोजित यह समारोह जैन शासन परंपरा का एक गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक अध्याय माना जा रहा है।

महोत्सव की संपूर्ण शास्त्रीय विधि-विधान व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शासन रत्न एवं जिन प्रतिष्ठा प्रभावक श्री मनोजकुमार बाबुमलजी हरण (सिरोही, राजस्थान) के निर्देशन में संपन्न होगी। उनके मार्गदर्शन में पदारोहण की सभी पारंपरिक और शास्त्रसम्मत प्रक्रियाएँ पूर्ण श्रद्धा और अनुशासन के साथ आयोजित की जाएंगी।
इस भव्य आयोजन में देशभर से चारों संप्रदायों के गुरुभक्त, साधु-साध्वी भगवंत पालीताणा पहुंच रहे हैं। सिद्धवड़ और खरतरवसहि के शीतल सान्निध्य में होने वाले इस समारोह को चारों संप्रदायों का आशीर्वाद और मंगल वाक्षेप प्राप्त हुआ है, जिससे शासन की अखंड परंपरा और एकता का भाव प्रकट हो रहा है।
तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत प्रथम दिवस 11 फरवरी को खरतरवसहि प्रांगण में ‘शक्रस्तव महाभिषेक’ और ‘सूरिमंत्र महापूजन’ के साथ महोत्सव का शुभारंभ होगा। द्वितीय दिवस 12 फरवरी को जैन भवन से जय तलेटी तक भव्य ‘शासन गौरव रथयात्रा’ निकाली जाएगी, जिसके बाद समस्त सूरिवरों को समर्पित ‘सूरि वंदनांजलि’ का आयोजन होगा। तृतीय दिवस 13 फरवरी को सिद्धवड़ की पवित्र भूमि पर सूर्योदय के दिव्य क्षणों में मुनिप्रवर का आचार्य पदारोहण संपन्न होगा, जो शासन परंपरा में स्वर्णाक्षरों में अंकित होने वाला ऐतिहासिक पल माना जा रहा है।
यह महोत्सव खरतरगच्छाचार्य, युगनायक धर्मशिरोमणि आचार्य देवेश श्री जिनपीयूषसागरसूरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा में आयोजित हो रहा है। आयोजन में श्री खरतरगच्छ सहस्राब्दी महामहोत्सव समिति, श्री ऋषभ जिनेश्वर पेढी पालीताणा, श्री नमिऊण पार्श्वनाथ मणिधारी जैन तीर्थ महाकौशल तथा देशभर के सैकड़ों संघों का सहयोग प्राप्त है।
अखिल भारतीय जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ महासंघ के वरिष्ठ सदस्य चम्पालाल बोथरा ने बताया कि पालीताणा की पावन धरा पर होने वाला यह आचार्य पदारोहणोत्सव न केवल खरतरगच्छ, बल्कि संपूर्ण जैन समाज के लिए अध्यात्म, एकता और शासन परंपरा के गौरव का ऐतिहासिक पर्व सिद्ध होगा।




