पाल में श्रुतज्ञान नगरी में निशीथ ग्रंथ के उपलक्ष्य में विविध कार्यक्रम
45 आगमों का पूजन और भव्य शोभायात्रा की तैयारी

SURAT. पाल स्थित श्रुतज्ञान नगरी में जैनाचार्य कुलचंद्रसूरिजी महाराज की पावन निश्रा में निशीथ ग्रंथ के बढ़ामणां (वंदना) स्वरूप विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला चल रही है। इस पावन अवसर पर जैनाचार्य पद्मदर्शनसूरिजी महाराज ने प्रवचन में कहा कि जैन धर्म शूरवीरों का धर्म है और सम्पूर्ण भारतवर्ष में जैन समाज के भीतर अपार प्रतिभा विद्यमान है।
बच्चों और युवाओं की छुपी प्रतिभा को मंच देने के उद्देश्य से एक भव्य टैलेंट शो का आयोजन किया गया, जिसे देखने के लिए चार हजार से अधिक दर्शक उपस्थित रहे। वहीं 15 से 50 वर्ष की आयु वर्ग की बेटियों और बहनों के लिए कुमारी विभाबेन पारेख ने दो घंटे का प्रभावशाली प्रवचन दिया। संगीत की सरवाणी के साथ उन्होंने फैशन, व्यसन और अंतरजातीय विवाह जैसे विषयों पर भावनात्मक प्रस्तुति देते हुए सात हजार से अधिक बहनों को प्रेरित किया।

शुक्रवार को प्रातः 9.30 बजे से 12.30 बजे तक 45 आगमों का भव्य पूजन संपन्न हुआ। इस दौरान 45 श्रमण भगवंतों ने प्रत्येक आगम का सार एक-एक वाक्य में गुजराती, हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत एवं प्राकृत भाषाओं में प्रस्तुत किया। वक्ताओं ने कहा कि जैन शासन श्रमण प्रतिभा से परिपूर्ण है और समाज, संस्कृति, संघ तथा राष्ट्र के लिए जैन श्रमणों का योगदान अद्वितीय रहा है।
प्रवचन में बताया गया कि पूर्वकाल में 84 आगम थे, लेकिन समय और स्मृति के क्षरण के कारण वर्तमान में 45 आगम ही उपलब्ध हैं। वैराग्यवारिधि पू. आचार्य श्री कुलचंद्रसूरिजी महाराज ने अब तक अपने तथा अन्य समुदायों के सैकड़ों श्रमण भगवंतों को 45 आगमों का गहन अध्ययन कराया है। आगम ग्रंथों पर उनकी अद्भुत पकड़ है और 95 वर्ष की आयु में भी वे प्रतिदिन 4 से 5 घंटे श्रमणों को अध्ययन करवाते हैं। उनके अप्रमत भाव और तपस्या को देखकर बड़े-बड़े विद्वानों के मस्तक नतमस्तक हो जाते हैं। 45 आगम भगवान महावीर का जीवंत दस्तावेज हैं, ऐसा उद्गार भी व्यक्त किया गया।
इस अवसर पर सूरत के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत विशिष्ट रत्नों को श्रुतज्ञान ज्योति उत्सव समिति की ओर से सम्मानित किया गया। आगामी 31 जनवरी को प्रातः 9.00 बजे निशीथ ग्रंथों की 12 गजराजों के साथ गुरुराम पावनभूमि से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो सम्पूर्ण पाल क्षेत्र में भ्रमण कर धर्मसभा में परिवर्तित होगी।




