प्रभु से बढ़कर कोई सुख या सम्पदा नहीं : बाल संत श्री भोलेबाबाजी
वर्तमान समय में गौमाता सबसे अधिक दुःखी : कथा वाचक

सूरत। शहर के गोडादरा क्षेत्र में श्री कृष्णा ड्रीम्स एवं स्टलर के पास, एसएमसी गार्डन के निकट गौ सेवा के पावन उद्देश्य से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा स्थल पर इन दिनों श्रद्धा और भक्ति का अनुपम वातावरण बना हुआ है। कथा वाचन कर रहे बाल संत श्री भोलेबाबाजी ने अपने प्रवचनों में कहा कि “प्रभु से बढ़कर इस संसार में कोई सुख या सम्पदा नहीं है।”
उन्होंने कहा कि जब जीव के भाग्य का उदय होता है, तभी उसे श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण का सौभाग्य प्राप्त होता है। जो कुछ भी भगवान गोविंद प्रदान करते हैं, वही भक्त के जीवन में कल्याणकारी सिद्ध होता है। कथा के दौरान उन्होंने धुंधकारी की कथा के माध्यम से कर्म, उनके फल और मोक्ष प्राप्ति का गूढ़ रहस्य सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत का पाठ और श्रवण मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पापों को नष्ट कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
बाल संत भोलेबाबाजी ने ज्ञान, भक्ति और वैराग्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव जीवन का परम उद्देश्य केवल प्रभु भक्ति है। उन्होंने पितामह भीष्म की कथा का भी मार्मिक वर्णन किया।

गौ माता पर विशेष संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में गौमाता सबसे अधिक दुःखी है। गांवों में गाय घरों में रहती है और कुत्ते गलियों में, जबकि शहरों में स्थिति इसके विपरीत हो गई है। उन्होंने कहा कि गाय चलता-फिरता तीर्थ है और जहां गौमाता होती है वहां देवताओं का वास होता है।
कथा के दौरान भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो गया। गुजरात प्रदेश महामंत्री सज्जन महर्षि ने बताया कि शनिवार सुबह 6 बजे प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में गौभक्तों ने भाग लिया। इस अवसर पर मुख्य मनोरथी घनश्याम सेवक (शिवशक्ति परिवार), संयोजक विप्र फाउंडेशन गुजरात प्रदेश अध्यक्ष तोलाराम सारस्वत सहित अनेक गणमान्य अतिथि एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे




