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पीएम-मित्र पार्क एमएसएमई हब बनें तो बढ़ेगा रोज़गार और निर्यात : चम्पालाल बोथरा

बांग्लादेश के गारमेंट संकट से भारत को ऐतिहासिक अवसर

सूरत।बांग्लादेश, जो चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा रेडीमेड गारमेंट निर्यातक रहा है, इस समय गंभीर राजनीतिक हिंसा, प्रशासनिक अस्थिरता, श्रमिक आंदोलनों और लॉजिस्टिक्स अव्यवस्था से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि वहां सैकड़ों गारमेंट फैक्ट्रियों में उत्पादन या तो ठप हो गया है या पूरी तरह बंद है। बंदरगाहों और सप्लाई-चेन में आई रुकावटों के कारण अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं, जिससे वैश्विक खरीदार वैकल्पिक देशों की तलाश में हैं।
इस पृष्ठभूमि में भारत के सामने रेडीमेड गारमेंट, निटवेअर और फैशन-अपैरल सेक्टर में एक ऐतिहासिक अवसर खड़ा हुआ है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की टेक्सटाइल एंड गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा ने कहा कि अमेरिका और यूरोप के बड़े खरीदार आज भारत को एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में देख रहे हैं, लेकिन यदि देश में एमएसएमई-केंद्रित गारमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से तैयार होता, तो बांग्लादेश से शिफ्ट हो रहे बड़े ऑर्डर भारत को तुरंत मिल सकते थे।
बोथरा ने कहा कि भारत के पास कच्चे माल की उपलब्धता, विशाल श्रमशक्ति, मजबूत घरेलू बाजार और उद्यमशीलता की बड़ी ताकत है, इसके बावजूद छोटे गारमेंट व्यापारियों और एमएसएमई के लिए किफायती तथा तुरंत चालू होने योग्य ‘प्लग-एंड-प्ले’ सुविधाओं की कमी आज भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की पीएम-मित्र (प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल) योजना का उद्देश्य ‘5F विज़न—(Farm to Fibre, Fibre to Factory, Factory to Fashion और Fashion to Foreign’) के तहत भारत को वैश्विक टेक्सटाइल-गारमेंट हब बनाना है।
उन्होंने कहा कि देश के सात पीएम-मित्र पार्क, विशेषकर गुजरात के सूरत-नवसारी क्षेत्र, इस लक्ष्य को साकार करने के लिए सबसे उपयुक्त मंच बन सकते हैं। सूरत पहले से ही यार्न, फैब्रिक, प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल ट्रेड का अंतरराष्ट्रीय केंद्र है और यहां गारमेंट सेक्टर को तेजी से विस्तार दिया जा सकता है।
कपड़ा व्यापार में बढ़ते उत्पादन तथा घरेलू और निर्यात संभावनाओं को देखते हुए चम्पालाल बोथरा ने सरकार से मांग की कि देश के सभी सात पीएम-मित्र पार्कों में एमएसएमई और छोटे गारमेंट व्यापारियों को प्राथमिकता दी जाए, रेडी-टू-यूज़ गारमेंट शेड्स का निर्माण कर उन्हें किराये या सरल आवंटन प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराया जाए, ताकि एमएसएमई प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर तुरंत उत्पादन शुरू कर सकें। साथ ही 2017 की गुजरात टेक्सटाइल नीति सहित सभी राज्य-स्तरीय नीतियों का प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि पीएम-पार्क पार्कों को केवल फैक्ट्री क्लस्टर तक सीमित न रखकर ‘स्वदेशी इंडियन गारमेंट ब्रांड हब’ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जहां डिजाइन, सैंपलिंग, टेस्टिंग, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स जैसी सभी सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध हों।
CAIT के अनुसार, यदि देश के सभी सात पीएम- पार्क एमएसएमई-आधारित गारमेंट हब के रूप में विकसित होते हैं, तो इससे लाखों नए रोजगार सृजित होंगे, भारत का गारमेंट निर्यात तेज़ी से बढ़ेगा, स्वदेशी भारतीय ब्रांड्स को वैश्विक पहचान मिलेगी और टेक्सटाइल सेक्टर का जीडीपी में योगदान और मजबूत होगा।
चम्पालाल बोथरा ने कहा कि आज वैश्विक गारमेंट सप्लाई-चेन में जो खाली स्थान बना है, उसे भरने की क्षमता केवल भारत के पास है, लेकिन इसके लिए बड़े निवेशकों के साथ-साथ छोटे एमएसएमई और गारमेंट व्यापारियों को भी बराबर का भागीदार बनाना होगा।पीएम- पार्क तभी सफल होंगे, जब वे छोटे उद्यमियों के लिए अवसरों के द्वार खोलेंगे। यही आत्मनिर्भर भारत, मेक-इन-इंडिया और ‘ब्रांड इंडिया’ की सच्ची पहचान बनेगी।

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