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MSME संकट का समाधान आयकर की सज़ा नहीं, ‘इनवॉइस–पेमेंट लिंकिंग’ है: CAIT

धारा 43बी( एच)से डर का माहौल,80% वर्किंग केपिटल वाले ट्रेड क्रेडिट को पारदर्शी बनाना जरूरी- चम्पालाल बोथरा

नई दिल्ली। देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) गंभीर संकट से गुजर रहे हैं, लेकिन इसकी वजह ऑर्डर की कमी नहीं बल्कि समय पर भुगतान न मिलना है। यह बात कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा ने कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयकर अधिनियम की धारा 43B(h) MSME की समस्या का समाधान नहीं है, क्योंकि यह केवल बैंक ऋण पर केंद्रित है, जबकि व्यापार की वास्तविक रीढ़ ट्रेड क्रेडिट (लगभग 80%) है।
बोथरा ने कहा कि टेक्सटाइल, गारमेंट और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भुगतान चक्र स्वाभाविक रूप से 60 से 120 दिनों का होता है। ऐसे में 45 दिनों में भुगतान की बाध्यता अव्यावहारिक है और इससे MSME अनजाने में अपराधी बनते जा रहे हैं। धारा 43B(h) के चलते व्यापार में संकुचन आ रहा है, खरीदार MSME के बजाय बड़े उद्योगों को प्राथमिकता देने लगे हैं, कई उद्यम MSME रजिस्ट्रेशन से बाहर हो रहे हैं और नए निवेश पर भी ब्रेक लग गया है, जिससे “वोकल फॉर लोकल” और स्थानीय रोजगार प्रभावित हो रहा है।
CAIT ने MSME संकट के समाधान के लिए डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा कि GSTN और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को जोड़कर इनवॉइस–पेमेंट लिंकिंग लागू की जाए, ताकि भुगतान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। इसके साथ ही कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग उनके भुगतान व्यवहार के आधार पर तय की जाए, समय पर भुगतान करने वालों को प्रोत्साहन मिले, बार-बार देरी करने वालों के लिए पारदर्शी डेटा व अर्ली वार्निंग सिस्टम बने और सभी सेक्टरों के लिए एक जैसा नियम लागू करने के बजाय सेक्टर-वार लचीली भुगतान नीति अपनाई जाए।
CAIT की टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि धारा 43B(h) को तत्काल स्थगित या संशोधित किया जाए और MSME को वास्तविक सुरक्षा देने के लिए ग्राउंड रियलिटी पर आधारित, तकनीक-संचालित “पेमेंट प्रोटेक्शन एक्ट” लाया जाए। बोथरा ने कहा कि MSME को डराकर नहीं, बल्कि तकनीक के जरिए समय पर भुगतान सुनिश्चित कर ही देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

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