मजूरा गेट स्थित श्री कैलासनगर जैन संघ में आचार्य पद्मदर्शनसूरिजी महाराज का आगमन
, दो दिवसीय मौन एकादशी आराधना प्रारंभ

सूरत। मजूरा गेट स्थित श्री कैलासनगर श्वेताम्बर मूर्ति पूजक जैन संघ में जैनाचार्य पूज्य पद्मदर्शनसूरिजी महाराज सहित श्रमण भगवंतों का दो दिवसीय आगमन होने पर पूरे संघ में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण छा गया। पूज्य आचार्यश्री के आगमन पर संघजनों ने अक्षित से गहूँली कर भावपूर्ण स्वागत किया। आचार्यश्री यहां दो दिनों तक मौन एकादशी आराधना हेतु स्थिर रहकर श्रावक-श्राविकाओं को आध्यात्मिक साधना का मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पू. आचार्यप्रवर पद्मदर्शनसूरिजी महाराज ने कहा कि आज का मनुष्य भ्रमणाओं के मलबे में दबा हुआ है। इस मलबे को हटाने के लिए कोई मशीन पर्याप्त नहीं—इसके लिए सत्य के बोध, आत्मचिंतन और सद्विचार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सत्य कभी असत्य नहीं बन सकता, भले आज का समय झूठ और दिखावे का क्यों न हो। भ्रम हमेशा भ्रम ही रहेगा और वास्तविकता अपनी जगह अटल।
आचार्यश्री ने आगे कहा कि वर्तमान समय में मानवमन तीन बड़ी भ्रांतियों में उलझा है—सुख भोगने की वस्तु है, दुःख हटाने की वस्तु है और पाप करने योग्य है। इन्हीं गलत मान्यताओं के कारण मनुष्य सुख की चाह में पाप करने से भी नहीं हिचकता। आज समाज में ‘लिया उसका—दिया तो नुकसान क्या हुआ?’ जैसी मानसिकता बढ़ रही है। फरेब, धोखाधड़ी और ड्रग्स माफियाओं का निडर व्यवहार समाज को भ्रम और विनाश की ओर ले जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पापों के करुण परिणाम मनुष्य भोग रहा है, फिर भी उसकी प्रवृत्तियाँ नहीं बदल रहीं। संसार के किसी भी सुख में स्थायित्व नहीं, फिर भी मनुष्य सच्चे सुख का पता नहीं लगा पा रहा। सच्चा सुख आत्मा के भीतर है, किंतु मनुष्य बाहर-बाहर भटक रहा है। दुःख भी पूर्वसंचित कर्मों के कारण आते हैं, और यदि शुभ कर्म निरंतर किए जाएँ तो दुःखों के द्वार स्वतः बंद होने लगते हैं।
धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और आचार्यश्री के उपदेशों का लाभ प्राप्त किया।




