जो अमंगल का नाश करे वही सच्चा मंगल है-जैनाचार्य पद्मदर्शनसूरिजी महाराज
वेसु स्थित महाविदेहधाम में जैनाचार्य पद्मदर्शनसूरिजी महाराज की पावन पदार्पण

सूरत।वेसु स्थित श्री महाविदेहधाम श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में जैनाचार्य पूज्य पद्मदर्शनसूरिजी महाराज सहित श्रमण भगवंतों की पावन पधारामणी से संपूर्ण परिसर धर्ममय वातावरण से सराबोर हो गया। इस शुभ अवसर पर अंकलेश्वर निवासी मातुश्री विदुलाबेन प्रदीपकुमार चोकसी परिवार द्वारा अक्षत वंदन के साथ गुरुदेव का भावपूर्ण स्वागत किया गया।
यह अवसर पूज्य “गुरुमां” युगप्रधान आचार्यसम पंन्यासप्रवर चंद्रशेखरविजयजी महाराज की पुण्य स्मृति से भी जुड़ा रहा। वर्षों पूर्व नवसारी स्थित तपोवन संस्कारधाम में उन्होंने विदुलाबेन को जैन धर्म का अत्यंत प्रभावशाली ‘उवसग्गहर स्तोत्र’ प्रदान किया था, जिसका मंत्रजाप आज भी अखंड रूप से जारी है। गुरुमां की ऋणमुक्ति के निमित्त महाविदेहधाम में उवसग्गहर स्तोत्र का विशेष महापूजन संगीत के सान्निध्य में संपन्न हुआ, जिसमें दूर–दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य आचार्य श्री पद्मदर्शनसूरिजी महाराज ने कहा कि जो अमंगल का नाश करे वही सच्चा मंगल है। आज का मानव दुख से तो घृणा करता है, लेकिन जिन दोषों से दुख उत्पन्न होते हैं, जैसे क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और निंदा, उनसे प्रेम करता है। जब तक मनुष्य इन दोषों के प्रति कठोर नहीं बनेगा, तब तक सच्चे सुख की प्राप्ति संभव नहीं है।उन्होंने कहा कि आज जोड़ने का समय है, तोड़ने का नहीं। योग-साधना ही परिवार, समाज और राष्ट्र को सही अर्थों में जोड़ने का मार्ग दिखाती है।




