
सूरत।आयकर विभाग द्वारा रिटर्न दाखिल किए जाने के बाद करदाताओं द्वारा भरी गई जानकारियों के आधार पर स्क्रूटिनी की जाती है। यदि दी गई जानकारी में कोई भी त्रुटि पाई जाती है, तो आयकर विभाग सीधे करदाता को नोटिस भेजता है। वर्तमान में आयकर विभाग करदाताओं की 10 अहम गतिविधियों पर विशेष रूप से नजर रख रहा है।
इनमें यदि किसी व्यक्ति ने एक ही दिन में किसी एक व्यक्ति से 2 लाख रुपये या उससे अधिक की राशि ली है, तो उसके लिए उचित कारण और स्रोत बताना अनिवार्य होगा। यदि संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं किया गया, तो आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
आधार कार्ड और पैन कार्ड के माध्यम से करदाता द्वारा पूरे वर्ष में की गई खरीदारी, विदेश यात्रा, क्रेडिट कार्ड भुगतान जैसी छोटी-बड़ी सभी जानकारियां अब आयकर विभाग को आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। इन सभी सूचनाओं के आधार पर करदाता का 26AIS फॉर्म तैयार किया जाता है। अधिकांश करदाता इसी फॉर्म के आधार पर आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं, लेकिन यदि कोई करदाता इस फॉर्म के अनुरूप रिटर्न दाखिल नहीं करता है, तो उसे आयकर नोटिस जारी किया जाता है।विशेष रूप से वर्षभर में किए गए खर्च, खाते में जमा की गई राशि या किसी व्यक्ति से ली गई रकम के आधार पर आयकर विभाग कार्रवाई करता है।
इन 10 स्थितियों में आयकर नोटिस आना तय माना जाता है—
1. सेविंग्स खाते में 10 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा कराई हो।2. करंट खाते में 50 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा कराई हो।3. क्रेडिट कार्ड में 1 लाख रुपये से अधिक की नकद राशि जमा की हो।
4. वर्षभर में क्रेडिट कार्ड से 10 लाख रुपये से अधिक का खर्च किया हो। 5. 30 लाख रुपये से अधिक कीमत की संपत्ति की खरीद या बिक्री की हो।
6. 10 लाख रुपये से अधिक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराई हो।
7. विदेश यात्रा पर 10 लाख रुपये से अधिक खर्च किया हो।
8. शेयर या बॉन्ड में 10 लाख रुपये से अधिक का निवेश किया हो।
9. किसी व्यक्ति से 50 हजार रुपये से अधिक की गिफ्ट ली हो।
10. किसी व्यक्ति से एक ही दिन में 2 लाख रुपये से अधिक की राशि ली हो।
इन सभी मामलों में आयकर विभाग की नजर सीधे करदाता पर रहती है और आवश्यकता पड़ने पर नोटिस जारी कर पूछताछ की जाती है।




