
सूरत। केंद्र सरकार ने टेक्सटाइल सेक्टर को राहत देने के उद्देश्य से यार्न पर जीएसटी दर 12% से घटाकर 5% कर दी थी। उम्मीद थी कि इससे यार्न की कीमतें कम होंगी और वीवर्स को राहत मिलेगी। लेकिन हकीकत इसके उलट सामने आई है। सूरत सहित विभिन्न बाजारों में यार्न के दाम घटने के बजाय लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे वीवर्स में चिंता का माहौल है।
बाजार सूत्रों के अनुसार, जीएसटी दर में कमी के बाद कई डीलरों और सप्लायर्स ने यार्न का बेसिक प्राइस बढ़ा दिया। नतीजतन, टैक्स में कटौती से मिलने वाला लाभ सीधे कीमतों में समा गया। परिणामस्वरूप कुल कीमतें कम नहीं हुईं, बल्कि उलटे और बढ़ गईं। खासकर विस्कोस यार्न में एक महीने के भीतर प्रति किलो लगभग 30 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केवल विस्कोस ही नहीं, बल्कि अन्य कई प्रकार के यार्न में भी दाम बढ़ाए गए हैं।
इस स्थिति ने सूरत के वीवर्स पर डबल बोझ डाल दिया है। एक ओर जीएसटी घटने का कोई लाभ उन्हें नहीं मिला, वहीं दूसरी ओर बढ़ी कीमतों से उत्पादन लागत भी बढ़ गई है। फिलहाल बाजार में ऑर्डर अच्छे हैं, लेकिन वीवर्स को ऊंचे दाम पर यार्न खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
टेक्सटाइल एसोसिएशन के अग्रणियों का कहना है कि जीएसटी में कमी का लाभ ग्राहकों तक न पहुंचना चिंताजनक है। बाजार की सप्लाई चेन पर कड़ी निगरानी जरूरी है। यदि यही स्थिति जारी रही, तो बढ़ती लागत के चलते सूरत के वीविंग उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता पर सीधा असर पड़ेगा।सूरत के वीवर्स अब सरकार और उद्योग मंडलों से इस समस्या पर गंभीर कदम उठाने की उम्मीद कर रहे हैं।




