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वर्तमान क्षण में रहना ही ध्यान है-आचार्य सम्राट शिवमुनि जी म.सा.

सूरत। आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने धर्मसभा में प्रवचन देते हुए कहा कि जैसे पक्षी पिंजरे में कैद नहीं रहना चाहता, वैसे ही आत्मा भी शरीर रूपी पिंजरे से मुक्त होना चाहती है। मोक्ष के लिए भीतर से गहरी प्यास जगानी होगी। वर्तमान क्षण में रहना ही सच्चा ध्यान है, क्योंकि भूत और भविष्य की चिंता ही बंधन का कारण है। अज्ञानता दुःख का कारण है जबकि ज्ञान से ही सुख की प्राप्ति होती है।

प्रमुखमंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में कहा कि मनुष्य पंचेन्द्रिय शरीर पाकर भी अज्ञानता के कारण पर और पुद्गल को अपना मानता है। यदि थोड़ी देर भी आत्मा में ठहर जाओ तो परमात्मा बन सकते हो। मोक्ष मार्ग के लिए शारीरिक मेहनत नहीं, बल्कि शुद्ध सामायिक और शुक्ल ध्यान आवश्यक है।

युवा मुनि श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने ‘‘ले शरण तेरी करें, भव पार हम’’ भजन प्रस्तुत किया। सभा में श्री पीह जैन संघ राष्ट्रीय समिति के 150 श्रद्धालु तथा चैन्नई, उदयपुर सहित कई जगहों से भक्त उपस्थित हुए। श्रीमती सूरज बाई (चैन्नई) ने भजन प्रस्तुत किया, वहीं साधिका श्रीमती मंजू जैन ने 105 एकासन का और श्रीमती श्वेता मेहता ने 24 एकासन का प्रत्याख्यान लिया।

शुक्रवार को प्रसिद्ध भजन गायक वैभव बाघमार आचार्य श्री के दर्शन हेतु पहुंचे और ‘‘गुरु के मिले चरण मेरे रोम खिल गए’’ भजन से भाव व्यक्त किए। ज्ञातव्य है कि आचार्य श्री जी के 84वें प्रकाशोत्सव से पूर्व 17 सितम्बर को भजन संध्या में वे प्रस्तुति देंगे।

विशेष: श्री ऑल इंडिया श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेंस की आत्म ध्यान प्रसार योजना के तहत 16 सितम्बर को सुबह 8 से 11 बजे तक जैनाचार्यजी यूट्यूब चैनल पर ऑनलाइन आत्म ध्यान साधना शिविर आयोजित होगा।

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