तेरापंथाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में क्षमापना दिवस का समायोजन
क्षमापना से होती है भावों की विशोधि : तेरापंथाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण

-चतुर्विध धर्मसंघ ही नहीं, समस्त प्राणियों से युगप्रधान अनुशास्ता ने की खमतखामणा
-चतुर्विध धर्मसंघ ने अपने आराध्य से की खमतखामणा
–साध्वीप्रमुखाजी, मुख्यमुनिश्री व साध्वीवर्याजी ने जनता को किया उद्बोधित
28.08.2025, गुरुवार, कोबा, गांधीनगर (गुजरात) :आठ दिनों के आध्यात्मिक, साधनात्मक समृद्धि को बढ़ाने वाला और अपनी आत्मा का कल्याण करने वाला महापर्व पर्युषण का शिखर दिवस भगवती संवत्सरी के बाद का सूर्योदय। जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ में क्षमापना दिवस का आयोजन। सूर्योदय से पूर्व ही वर्तमान तेरापंथाधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि उमड़ता, श्रद्धा, आस्था, उमंग व समर्पण का पारावार। देश-विदेश से गुरु सन्निधि में पुर्यषण महापर्व को मनाने के पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं के साथ-साथ अहमदाबाद, गांधीनगर व अन्य आसपास के महानगरों व नगरों में प्रवास करने वाले श्रद्धालु अपने आराध्य की सन्निधि में उमड़ते जा रहे थे। श्रद्धालुओं पर विशेष कृपा करते हुए तेरापंथाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी सूर्योदय के आसपास होने वाले बृहद् मंगलपाठ तथा क्षमापना दिवस के संदर्भ में प्रातःकालीन आयोजित होने वाले कार्यक्रम के संदर्भ में प्रेक्षा विश्व भारती परिसर में बने भव्य एवं विशाल ‘वीर भिक्षु समवसरण’ में पधारे तो पहले से ही जनाकीर्ण बना समवसरण जयघोष से गुंजायमान हो उठा। मानों प्रातःकाल का निरव वातावरण इस आध्यात्मिक जयघोष से जागृत-सा बन गया.

मंच पर विराजमान देदीप्यमान तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान देदीप्यमान महासूर्य आचार्यश्री महाश्रमणजी के एक ओर साधु समाज, दूसरी ओर साध्वी समाज तो सम्मुख समणी वर्ग, मुमुक्षुवृंद व श्रावक-श्राविका समाज। आचार्यश्री ने बृहद् मंगलपाठ का प्रारम्भ कर समुपस्थित विशाल जनमेदिनी में मानों ऊर्जा का नवीन संचार कर रहे थे। एक दिन पूर्व भगवती संवत्सरी के अवसर एक दिवसीय उपवास करने वाले श्रद्धालु इस आध्यात्मिक ऊर्जा को ग्रहण कर स्वयं को मानसिक रूप से पुष्ट बना रहे थे। बृहद् मंगलपाठ के उपरान्त आचार्यश्री ने उपवास व पौषध के संदर्भ में श्रद्धालुओं को अपनी धारणा के अनुसार सामायिक करने की अलोयणा प्रदान की।
तदुपरान्त प्रारम्भ हुआ क्षमापना दिवस से संदर्भित कार्यक्रम। तेरापंथी सभा-अहमदाबाद के अध्यक्ष श्री अर्जुनलाल बाफना, प्रेक्षा विश्व भारती के अध्यक्ष श्री भेरुलाल चौपड़ा, श्री निर्मल बोथरा, तेरापंथ महिला मण्डल-अहमदाबाद की अध्यक्ष श्रीमती सुशीला खतंग, तेरापंथ युवक परिषद-अहमदाबाद के अध्यक्ष श्री प्रदीप बागरेचा, पारमार्थिक शिक्षण संस्था की ओर से श्री बजरंग जैन, जय तुलसी फाउण्डेशन की ओर से श्री बाबूलाल सेखानी, जैन विश्व भारती के अध्यक्ष श्री अमरचन्द लुंकड़, अमृतवाणी के अध्यक्ष श्री ललित दुगड़, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम की ओर से श्री जागृत संकलेचा, प्रेक्षा इण्टरनेशनल व आचार्यश्री महाश्रमण चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति-अहमदाबाद के अध्यक्ष श्री अरविंद संचेती ने आचार्यश्री सहित समस्त चारित्रात्माओं से खमतखामणा की।

साध्वीवर्या साध्वी सम्बुद्धयशाजी, साध्वीप्रमुखाश्री विश्रुतविभाजी व मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने क्षमापना दिवस के संदर्भ में अपनी अभिव्यक्ति दी। तदुपरान्त साध्वीप्रमुखाजी सहित समस्त साध्वी समाज ने सविधि वंदन कर आचार्यश्री से खमतखामणा की।
महातपस्वी, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने इस अवसर पर समुपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि आगम में क्षमापना के संदर्भ में प्रश्न किया गया कि भगवन! क्षमापना से जीव को क्या लाभ होता है? उत्तर दिया गया कि क्षमापना से प्राह्लाद भाव प्राप्त होता है। किसी के साथ वैर भाव होता है, मन में उसके प्रति द्वेष का भाव होता है। जब उस व्यक्ति से खुलकर खमतखामणा हो गया तो फिर उससे मिलने पर खुशी का भाव होता है। क्षमापना से वैर का भाव, विरोध का भाव समाप्त हो सकता है और मैत्री का भाव जागृत हो सकता है। सभी प्राणों, भूतों व जीवों के प्रति मैत्री की भावना से आत्मा जागृत हो जाती है। इससे भाव की विशोधि होती है और उससे जीव निर्भय बन सकता है।

जैन शासन में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ परंपरा में पर्युषण व संवत्सरी का क्रम चलता है। हमने आठ दिनों की आराधना की। हमारा अष्टदिवसीय महापर्व सुसम्पन्न हो चुका है। आज उसके नवमे दिन खमतखामणा का दिन और इन अष्टदिवसीय कार्यक्रमों का समापन समारोह भी है। वैर के भावों की गांठ न खुले तो फिर सम्यक्त्व भी खतरे में आ सकता है। इसलिए आज दिन प्रायोगिक रूप में खमतखामणा का दिन है। हम सभी समूह में जीते हैं, समाज में रहते हैं। अनेक लोगों से बोलने से, कहने से व व्यावहारिक रूप से कार्य पड़ सकता है। नेतृत्व करने के संदर्भ में चतुर्विध धर्मसंघ से व्यवहार होता है। हमारी साध्वीप्रमुखाजी से अनेकानेक विषयों पर चर्चा, वार्ता, निर्णय-निर्देश, चिंतन आदि-आदि में कुछ भी कठोर व्यवहार हो गया हो तो खमतखामणा। साध्वीप्रमुखाजी ने आचार्यश्री से खमतखामणा की। इसी प्रकार आचार्यश्री ने साध्वीवर्याजी व मुख्यमुनिश्री से खमतखामणा की तो दोनों चारित्रात्माओं ने आचार्यश्री को संविधि वंदन कर खमतखामणा की। आचार्यश्री ने मुनि धर्मरुचिजी से भी खमतखामणा की। आचार्यश्री ने साध्वी समाज, साधु समाज, समणीवृंद, मुमुक्षु वृंद तदुपरान्त समस्त श्रावक-श्राविकाओं से खमतखामणा की। केन्द्रीय संस्थाओं आदि-आदि व्यवस्थाओं से जुड़े हुए पदाधिकारियों आदि से भी खमतखामणा की। आचार्यश्री ने यही से दूरस्थ स्थित साधु-साध्वियों से भी खमतखामणा की। तदुपरान्त अन्य धर्म, समुदाय के संतों, राजनैतिक लोगों से भी आचार्यश्री ने खमतखामणा की। आचार्यश्री जैसे लोगों से खमतखामणा करते गए, समस्त लोगों ने आचार्यश्री से करबद्ध होकर खमतखामणा की। आचार्यश्री की अनुज्ञा से साधु व साध्वीवृंद ने खमतखामणा की। श्रावक समाज की ओर से श्री अरुण बैद ने आचार्यश्री व चारित्रात्माओं से खमतखामणा की। परस्पर खमतखामणा आदि के क्षमापना के साथ पर्युषण महापर्व सुसम्पन्न हुआ।




