गुजरातसामाजिक/ धार्मिकसूरत सिटी

संसार में रहते हुए आत्माभिमुख बनें-आचार्य शिवमुनि

बलेश्वर/सूरत।‘मनुष्य का जीवन ओस की बूंद के समान है, जिस तरह से सुबह हरी घास पर गिरी हुई ओस की बूंद मोती की तरह चमकती है किंतु जैसे ही धूप निकलती है वह मिट जाती है, ऐसे ही मनुष्य का जीवन नश्वर है।’’ उपरोक्त विचार आत्मज्ञानी सद्गुरुदेव आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने उपस्थित धर्म सभा को संबोधित करते हुए फरमाये।

आचार्य भगवन ने आगे फरमाया कि इस संसार में रहते हुए मनुष्य अपनी दृष्टि बदल कर मेरेपन का भाव छोड़ने का प्रयास करे। जिस तरह से एक धाय मां छोटे बच्चे का पूरा ध्यान रखती है, किंतु उसके मन में यह भाव रहता है कि यह बच्चा मेरा नहीं है और एक गृहणी रसोई बनाते हुए उसका ध्यान अपने छोटे बच्चे की ओर रहता है इसी प्रकार मनुष्य इस संसार में रहते हुए ध्यान अपनी आत्मा की ओर रहे। मनुष्य के पूरे शरीर में पैर के अंगूठे से लेकर सिर तक आत्म प्रदेश रहते हैं उसी आत्मप्रदेश के द्वारा ही सारा शरीर गतिमान रहता है, जब आत्मा शरीर से निकल जाती है तो शरीर का कोई मूल्य नहीं होता है।

उन्होंने यह भी फरमाया कि व्यक्ति का जीवन सुबह के सूरज की तरह खिलता हुआ बचपन होता है, दोपहर जवानी की तरह होता है और सायं बुढापे की तरह होता है और फिर रात्रि होती है उसी तरह मनुष्य जीवन समाप्त हो जाता है।

आचार्य भगवन ने ध्यान की प्रेरणा प्रदान करते हुए फरमाया कि मंत्र, माला आदि धर्म का आलम्बन है किंतु आत्म ध्यान एक ऐसी विधि है जो जन्म-मरण से पार ले जा सकती हैं।

प्रमुखमंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में फरमाया कि व्यक्ति दिन और रात में अधिक समय अपने शरीर को देता है या आत्मा को, यह अवलोकन का विषय है। कोई भी कार्य करते हुए यदि ध्यान आत्मा में है तो वह व्यक्ति आत्मार्थी है। आत्मा की साक्षी से इस शरीर के द्वारा कर्मों को क्षय करना ही लक्ष्य होना चाहिए। अनावश्यक क्रियाओं को सीमित करने का पुरुषार्थ करना चाहिए। एक साधक जब साधु बन जाता है तो उसकी अनावश्यक क्रियाएं कम हो जाती है वह कर्मों को निर्जरित करने की ओर आगे अग्रसर होता है।

आज पुष्कर भवन वेसु से शील महिला मण्डल गुरु दर्शन हेतु उपस्थित हुआ। मुंबई, बैंगलोर, जोधपुर आदि जगहों से भी श्रद्धालु दर्शन हेतु उपस्थित हुए।पुष्कर भवन वेसू शील महिला मण्डल की ओर से श्रीमती रेणू जैन ने अपनी भावनाएं व्यक्त की।

आत्म ध्यान शिविर का द्वितीय दिवस –आत्मज्ञानी सद्गुरुदेव ध्यान योगी आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. की प्रेरणा एवं मंगल आशीर्वाद से कुप्पकलां एवं नाशिक में आत्म ध्यान धर्म यज्ञ का आज दूसरा दिन है। कुप्पकलां में 21 एवं नाशिक सेंटर में 41 आत्मार्थी साधक-साधिकाएं भाग ले रहे हैं। शिविरार्थियों हेतु शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन के द्वारा आवास, भोजन की सुन्दर व्यवस्था निःशुल्क उपलब्ध रहती है।

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