राजस्थानसामाजिक/ धार्मिक

सामायिक  से कर्मो की निर्जरा होती हैं-मुनिराज श्रेयांसप्रभसागर

आराधना भवन में अखण्ड नवकार जाप का हुआ आयोजन

सामायिक साधना का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है-मुनि श्रेयांससागर
बाड़़मेर। कोटड़िया-नाहटा ग्राउण्ड स्थित सुधर्मा प्रवचन वाटिका में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ चातुर्मास कमेटी के तत्वाधान में एवं खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्रीजिनमणिप्रभसूरीश्वर म.सा. की पावन निश्रा व बहिन म.सा. साध्वी डाॅ. विधुत्प्रभाश्री व श्रमण-श्रमणीवृन्द के पावन सानिध्य में चल रहे संघ शास्ता वर्षावास 2025 के दौरान सोमवार को मुनिराज श्रेयांसप्रभसागरजी म.सा.ने श्राम सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि जैन धर्म का कर्तव्य है कि एक सामायिक हर किसी को नियम होना चाहिए। सामायिक एक ऐसी साधना है जो अपने आप में सावधानी के लिए सर्वश्रेष्ठ मार्ग है। सामायिक जैन शासन की बहुत बड़ी आराधना की व्यवस्था है। जैन शासन में किसी भी विधान क्रिया को अपने से जोड़ना हो तो संकल्प रूपी प्रत्याखान लेते हैं प्रत्याखान के बिना क्रिया तप सार्थक नहीं कहा जाता। संकल्प खंडित हो तो महादोष के भागीदार बनते हैं एक सामायिक में अनेक कर्मों की निर्जरा होती है। कर्तव्य के अंतर्गत परमात्मा दर्शन करना भी हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण अंग की तरह होना चाहिए। जब भी हम परमात्मा के प्रतिमा का दर्शन करें तो हमें भाव रखना यह चाहिए। और महापुरुषों ने कहा भी कहा है। जिन प्रतिमा जिन सरीखी की जानो, ना करो शंका कई। दर्शन अर्थात देखना नहीं होता हमें परमात्मा की प्रतिमा को निहारना है और दर्शन का दूसरा अर्थ श्रद्धा। श्रद्धा पूर्वक परमात्मा के दर्शन करके मन को निर्मल बनाकर प्रसन्नता का पान करना है देवों के देव अरिहंत परमात्मा के अवलोकन मात्र से हमारे पापों का नाश होता है। परमात्मा का दर्शन स्वर्ग लोक की सीढ़ी का काम करता है। इसलिए परमात्मा के दर्शन मन्दिर करने में होने वाले 84 आशातनावो का ध्यान रखना है। सूक्ष्मता व सविधि से किया गया एक बार दर्शन अनंत गुणकारी है। परमात्मा के दर्शन से आत्म दर्शन का अवलोकन आद्र कुमार ने किया था।
चातुर्मास कमेटी के ट्रस्टी विनीत हालावाला व मीडिया संयोजक कपिल मालू ने बताया कि सोमवार को आयंबिल की तपस्या मंजूदेवी घेवरचन्द बोथरा की रही। खरतरगच्छाधिपति के सूरि मंत्र की पीठिका के निमित सोमवार से आराधना भवन में 21 दिन तक प्रातः 06.00 बजे से सांय 06.00 बजे तक अखण्ड नवकार मंत्र का जाप व सांय 08.15 बजे से 09.00 बजे तक दादा गुरूदेव के इक्कतीसा पाठ आयोजन सम्पन्न हुआ और लक्की ड्रा निकाले गये।

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