रिश्ते हम बनाते है। नाते परमात्मा बनाता है,परिवार परमात्मा का प्रसाद है। -पंडित विजय शंकर मेहता

श्री माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा आयोजित शिव महापुराण कथा के अंतिम दिन मंगलवार को सिटीलाइट स्थित महेश्वरी भवन में व्यास पीठ से पंडित विजय शंकर मेहता ने बारह ज्योतिर्लिंग का वर्णन किया , उन्होंने कहा किसभी ज्योतिर्लिंग अपने आप में महत्वपूर्ण है। सोमनाथ के प्रसंग में दक्षराज द्वारा अपनी 27 कन्याओं का चन्द्र के साथ विवाह करना फिर चन्द्रमा का रोहिणी से ज्यादा लगाव रखने पर दक्षराज द्वारा चन्द्रमा को श्राप देना बताया। मल्लिकार्जुन के प्रसंग में बच्चों के जीवन में अंधकार व् प्रकाश का वर्णन किया। उज्जैन महाकालेश्वर को संसार को भी पवित्र करने वाली नगरी बताया एवं ओमकारेश्वर, केदरनाथ आदि का वर्णन किया। उसके बाद पारिवारिक रिश्तों पर अपने संबोधन में पंडित विजय शंकर मेहता ने कहा कि रिश्ते हम बनाते है। नाते परमात्मा बनाता है, परिवार परमात्मा का प्रसाद है। नाते में कोई गड़बड़ हो तो प्रभु से प्रार्थना करे। उन्होंने आगे कहा कि प्रभु से हम हमारे हित के लिए सौ बार प्रार्थना करें किन्तु किसी के अहित के बारे में कभी नहीं सोचे। बीच बीच में रिश्ते नाते भाईचारा …… यह जीवन का सहारा है। जब जब दुःख ने पैर पसारे बने सब के सहारा है।

आदि भजनों की प्रस्तुति से हॉल में उपस्थित श्रोता भाव विभोर हुए , अन्त में उन्होने कहा कि जीवन में हम कितने भी मित्र बनाएं पर खून के रिश्तो को कभी नहीं भूले। त्रिदिवसीय शिव महापुराण कथा में मंडल के सभी पदाधिकारी
पूर्व पदाधिकारी एवं सभी सदस्याओं का विशेष सहयोग रहा।




