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दुःख तो मरया पछे ही छूटेला तो हर हाल में खुश रहों ना फिर-आचार्यश्री जिनमणिप्रभसूरीश्वर

आप कितने भी आधुनिक हो गए मगर महापुरूषों के सिद्धांत आज भी जीवन का सार है- खरतरगच्छाधिपति

300 यात्री बैंगलोर से पहुंचे गुरू दर्शन करने और चातुर्मास कमेटी ने किया स्वागत व बहुमान

बाड़़मेर 10 सितम्बर। कोटड़िया-नाहटा ग्राउण्ड स्थित सुधर्मा प्रवचन वाटिका में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ चातुर्मास कमेटी के तत्वाधान में संघ शास्ता वर्षावास 2025 का चातुर्मास खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्रीजिनमणिप्रभसूरीश्वर म.सा. की पावन निश्रा व बहिन म.सा. साध्वी डाॅ. विधुत्प्रभाश्री व श्रमण-श्रमणीवृन्द के पावन सानिध्य में बुधवार को आचार्यश्री ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि जीवन क्या है, कैसा है, कैसा होना चाहिए। ये तीन बातें बडी महत्वपूर्ण है। एक ही बात कई बार अलग-अलग अर्थ निकलते है। मगर सिस्टम के साथ जो चलता है वही व्यक्ति ये फैसला ले पाता है कि उसका जीवन कैसा होना चाहिए। यू तो संसार में आने के बाद समस्याओं का दौर प्रारम्भ होता और जब तक है तब तक समस्याएं साथ ही। मारवाड़ी में कहावत है कि ओ मरया पछे ही छूटे ला। तो ये तय कर लो मेरा जीवन ऐसा हो कि मौत भी आए तो कोई पछतावा जैसी बात नही रहे। परमात्मा महावीर ने कहा कि महापुरूषों ने जो सिद्धांत दिए आप देख जो हजारों साल भी इस आधुनिक यूग में भी सटीक क्यों बैठ रहे है। इसका कारण है कि अनुभव,ज्ञान और दूरदर्शी सोच। जिस वस्तु को विज्ञान ने खोजा है वो तो हमारें महापुरूष हजारों साल पहले ग्रंथो में लिखकर छोड़ गए। बस अनुसरण नही कर पाते अनुसरण नही करते तो अनुशासनहीनता आती है यही से जीवन के दुखों की शुरूवात होती है। व्यक्ति को कमाना, परिवार चलाना, रिश्तेदारी निभाना, दुनिया के सिस्टम से चलना सब करना होता है वो करता भी। लोगों के कहने पर चलता है,उनकी सुनता है, मगर जिस दिन व्यक्ति ने स्वयं के लिए 24 घंटों में दस मिनट भी सोचना प्रारम्भ कर दिया ना उस दिन से जीवन का सिस्टम अपने आप सुधरना प्रारम्भ हो जाएगा।

चातुर्मास कमेटी के ट्रस्टी विनीत हालावाला व मीडिया संयोजक कपिल मालू ने बताया कि सुधर्मा प्रवचन वाटिका में बुधवार को श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के तत्वावधान में केयुप शाखा बैंगलोर द्वारा आयोजित चार दादावाड़ी व दादा गुरूदेव जन्म स्थली की यात्रा कर 300 यात्रियों का संघ बाड़मेर पहुंचा, जहां गुरूदेव के दर्शन कर प्रवचन माला सुनी और चातुर्मास कमेटी की ओर से बहुमान किया गया।

बाहरी राज्यों से गुरूभक्त सुरेश कांकरिया रायपुर, सम्पतराज झाबक, प्रकाशचन्द मालू, राजकुमार लूणावत, प्रकाश श्रीश्रीश्रीमाल जोधपुर, कल्पेश पालरेचा सेलम, भंवरलाल गोगड़ जोधपुर, विजयराज बाघमार चैन्नई, मुकेश चण्डालिया झालरा, सदगुरू शरणम संघ यात्रा बैंगलोर संयोजक राजेन्द्र गोलेच्छा, विकास पारख, निलेश मेहता, विनीत संखलेचा, मेहुल कवाड़ तिरूपातुर, जैन श्री संघ अहीवारा अध्यक्ष मेवीलाल वडेरा, खरतरगच्छ संघ बैंगलोर अध्यक्ष संघवी प्रकाशचन्द भंसाली, राष्ट्रीय केएमपी उपाध्यक्षा आरती जैन सहित कई गुरूभक्तों का गुरूभक्तों का चातुर्मास कमेटी द्वारा बहुमान किया गया।

केएमपी बैंगलोर संगीता पारख द्वारा गुरूचरणों में दो लाइन गीतिका प्रस्तुति दी। प्रवचन के बाद केयुप शाखा बैंगलोर द्वारा आयोजित संघ सदगुरू शरणम द्वारा संघ पूजन किया गया। केयुप शाखा बैंगलोर का केयुप शाखा बाड़मेर द्वारा स्वागत व अभिनन्दन किया गया

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