आत्मार्थी साधक अपनी आत्मा को महत्त्व देता है -आचार्य सम्राट डॉ. शिवमुनि जी म.सा.

अवध संगरीला, बलेश्वर, सूरत।आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि व्यक्ति को अपनी आत्मा पर अटल श्रद्धा होनी चाहिए। शरीर तो नश्वर है, मिटने वाला है। जब तक उसके शरीर के भीतर आत्म तत्व रहता है तब तक शरीर की चाह होती है, जब व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है उसके शरीर से आत्मा निकल जाती है तो उसे एक दिन भी घर में नहीं रखते इसलिए आत्मा मुख्य है। आत्मा है तो शरीर का मूल्य है। एक आत्मार्थी साधक अपनी आत्मा को महत्त्व देता है आत्मा में स्थित रहता है। एक सामान्य व्यक्ति भी अपने पुरुषार्थ के द्वारा सिद्धशिला, मोक्ष को प्राप्त कर सकता है।

उन्होंने आगे फरमाया एक धाय मां जो छोटे का बच्चे का पूरा ध्यान रखती है किंतु वह यह भी जानती है कि यह बच्चा मेरा नहीं है, इसी प्रकार यह जो शरीर मिला है वह अपना नहीं है, अपनी आत्मा ही परमात्मा है। इसलिए व्यक्ति इस संसार में रहते हुए कमल की तरह निर्लेप रहने का प्रयास करे तो वह कर्म बंधन से दूर रह सकता है।
उन्होंने ‘सोह्म’ की साधना का उल्लेख करते हुए फरमाया कि ‘सोह्म’ अर्थात् वह आत्मा जो सिद्धों में, अरिहंतों में है, मनुष्य, पशु-पक्षियों, नरकों के सभी जीवों में है और पूरे ब्रह्माण्ड में है वह शुद्ध आत्मा हम सभी में है। हम सौभाग्यशाली हैं कि भगवान महावीर का धर्म शासन मिला है। भगवान महावीर की साधना आत्मा की साधना है।
प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने उद्बोधन में फरमाया कि जब तक व्यक्ति तैरना सीखता नहीं है तब तक उसे सहारे की आवश्यकता होती है उसी प्रकार जब तक व्यक्ति को शुक्ल ध्यान की पूर्ण समझ नहीं आती तब तक वह धर्म ध्यान का आलम्बन लेता है। जब वह शुक्ल ध्यान की अखण्ड धारा में गतिमान हो जाता है तो फिर उसे किसी आलम्बन की आवश्यकता नहीं होती।
युवामनीषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने पार ’कोई गा न सके, कोई पार पा न सके हे देव तेरी महिमा अपार है’’ सुमधुर भजन की प्रस्तुति दी।श्री शाश्वत मुनि जी म.सा. ने सभी को आत्माभिमुख होने की प्रेरणा प्रदान की।

आज आरकोणम, चैन्नई, बैंगलोर, दिल्ली, पूना, अहमदनगर, पातड़ा (पंजाब) आदि क्षेत्रों से संघ गुरु दर्शन हेतु उपस्थित हुआ।
राणिया (हरियाणा) से श्री बहादुरचन्द जी जैन, श्रीमती कान्ता जैन, श्रीमती प्रर्मिला जैन, श्रीमती सुषमा जैन के साथ वैरागण कृतिका, वैरागण आराध्या गुरु दर्शन हेतु उपस्थित हुई। वैरागण बहनों का फाउण्डेशन की ओर से शॉल, माला द्वारा सम्मान किया।
विशेष – आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. के आगामी 18 सितम्बर 2025 को 84वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में श्री ऑल इण्डिया श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेंस राष्ट्रीय महिला शाखा नई दिल्ली द्वारा 84 हजार एकासन के संकल्प पत्र तैयार किये गये है। जिसके तहत देशभर के श्रावक-श्राविकाएं एकासन तप द्वारा जन्मोत्सव मनाएंगे।




