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बांग्ला भाषी नागरिकों की कथित अवैध हिरासत मामले में हाईकोर्ट ने सूरत पुलिस से मांगी रिपोर्ट

हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई; 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं करने का आरोप, 16 जुलाई तक मांगा जवाब

सूरत। सूरत शहर से 30 जून को तीन बांग्ला भाषी नागरिकों को कथित रूप से अवैध तरीके से हिरासत में लिए जाने के मामले में गुजरात हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हिरासत में लिए गए लोगों को कानून के अनुसार 24 घंटे के भीतर संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकारी पक्ष को निर्देश दिया कि वह 16 जुलाई तक सूरत पुलिस से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट और आवश्यक निर्देश प्राप्त कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता रसना मौलाना ने अधिवक्ता जमीर शेख के माध्यम से गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि 30 जून 2026 को याचिकाकर्ता के माता-पिता और बड़े भाई सहित तीन लोगों को पुलिसकर्मी अपने साथ ले गए थे। इसके बाद परिवार को न तो हिरासत का कोई लिखित नोटिस दिया गया और न ही उनकी गिरफ्तारी अथवा हिरासत का कोई आधिकारिक कारण बताया गया।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जमीर शेख ने अदालत में दलील दी कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 187 के अनुसार किसी भी गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में तीनों व्यक्तियों को कथित रूप से गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है और अब तक उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया, जो कानून और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

दोनों पक्षों की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सरकारी वकील को निर्देश दिया कि वे तत्काल सूरत पुलिस से संपर्क कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी और आवश्यक निर्देश प्राप्त करें तथा अगली सुनवाई पर अदालत को अवगत कराएं। मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को निर्धारित की गई है।

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