गांधीनगर। गुजरात सरकार के गृह विभाग ने फौजदारी मामलों की जांच और अभियोजन व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य में यदि किसी फौजदारी मामले में आरोपी अदालत से बरी होता है, तो संबंधित मामले की जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों तथा सरकारी वकील (पब्लिक प्रोसिक्यूटर) की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी। यदि जांच या अभियोजन में लापरवाही, गंभीर त्रुटि या जानबूझकर की गई चूक सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गृह विभाग द्वारा जारी सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, ऐसे मामलों की विस्तृत समीक्षा के लिए चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। इस समिति में डायरेक्टर ऑफ प्रोसिक्यूशन, डीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) तथा उप सचिव स्तर के दो वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
समिति प्रत्येक बरी हुए मामले की फाइल का गहन अध्ययन करेगी और यह जांच करेगी कि आरोपी के बरी होने के पीछे क्या कारण रहे। समीक्षा के दौरान यह देखा जाएगा कि पुलिस जांच में कोई कमी तो नहीं रही, आवश्यक साक्ष्य सही तरीके से जुटाए गए थे या नहीं तथा पब्लिक प्रोसिक्यूटर ने अदालत में प्रभावी ढंग से पैरवी की थी या नहीं।
यदि जांच में यह पाया जाता है कि किसी अधिकारी या सरकारी वकील ने लापरवाही बरती है अथवा जानबूझकर अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन नहीं किया, तो उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आवश्यक कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से आपराधिक मामलों की जांच और अभियोजन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही सुनिश्चित होगी तथा न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।


