
सूरत। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के प्रमुख पीपी मेखिया और सदस्य डॉ. तीर्थेश मेहता ने सेवा में खामी बरतने पर आदित्य बिड़ला फाइनेंस के खिलाफ महत्वपूर्ण आदेश सुनाया है। मामले के अनुसार शाहपोर निवासी शिकायतकर्ता देविकाबेन प्रविणकुमार चांडक (प्रोप्राइटर, श्री साईंनाथ सेल्स) ने कंपनी से 37 लाख रुपये का लोन लिया था। 31 अक्टूबर 2022 को 17.70 लाख रुपये सीधे कंपनी के खाते में जमा कर पूरी लोन राशि चुका दी थी। लोन क्लियर होने के बाद उन्होंने बार-बार नो-ड्यूज/लोन क्लोजर सर्टिफिकेट की मांग की, लेकिन फाइनेंस कंपनी ने चार महीने के विलंब के बाद 17 फरवरी 2023 को सर्टिफिकेट जारी किया। शिकायतकर्ता के वकील ईशान देसाई ने कोर्ट में दलीलें पेश कीं। विरोधी पक्ष नोटिस मिलने के बावजूद वे आयोग के समक्ष हाजिर नहीं हुए, जिसके कारण केस एकतरफा चलाया गया। आयोग ने माना कि लोन चुकाने के बाद भी चार महीने तक सर्टिफिकेट न देना सेवा में लापरवाही है। इसके लिए कमीशन ने प्रति माह 15,000 रुपये के हिसाब से तीन महीने की देरी के लिए कुल 50 हजार रुपये का मुआवजा 30 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को चुकाने का आदेश दिया है।




