
सूरत। सूरत स्थित ओरो यूनिवर्सिटी में 1 और 2 मई को आयोजित दो दिवसीय ‘वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस–दक्षिण गुजरात’ का भव्य समापन हुआ। सम्मेलन के दौरान कुल 3.53 लाख करोड़ रुपये के 2792 एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसकी जानकारी राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने समापन अवसर पर दी। उन्होंने कहा कि इस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दक्षिण गुजरात की औद्योगिक क्षमता को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है तथा आगामी तीन वर्षों में इन परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 2.82 लाख युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि इस सम्मेलन ने दक्षिण गुजरात के समग्र विकास की मजबूत आधारशिला रखी है, जिससे यह क्षेत्र आने वाले समय में आर्थिक प्रगति की बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार हो गया है। उन्होंने गुजरात की आर्थिक ताकत का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य देश की कुल जीडीपी में लगभग 8 प्रतिशत योगदान देता है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में 17 प्रतिशत, मर्चेंडाइज निर्यात में 27 प्रतिशत तथा देश के कुल कार्गो हैंडलिंग में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी गुजरात की है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू किया गया ‘वाइब्रेंट गुजरात’ मॉडल उद्योग और सरकार के बीच संवाद तथा सहयोग की नई संस्कृति स्थापित करने वाला ऐतिहासिक कदम साबित हुआ, जो आज देश के अन्य राज्यों के लिए भी आदर्श बन चुका है। सकारात्मक नीतियों और उद्योग अनुकूल वातावरण के कारण भारत आज वैश्विक निवेश के लिए विश्वसनीय गंतव्य बनकर उभरा है।

दक्षिण गुजरात की औद्योगिक विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सूरत का हीरा और टेक्सटाइल उद्योग तथा भरूच, दहेज और अंकलेश्वर के केमिकल एवं फर्टिलाइजर उद्योग वैश्विक स्तर पर पहचान बना चुके हैं। अब टेक्सटाइल के साथ गारमेंट उद्योग को आदिवासी क्षेत्रों से जोड़कर विकास के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने अपने संबोधन में कहा कि वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस राज्य में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए ऐतिहासिक साबित हुई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार केवल बड़े उद्योगपतियों तक सीमित न रहकर छोटे और मध्यम उद्यमियों को भी वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार निवेशकों और उद्योगकारों को विश्वभर के बायर्स से जोड़ने तथा आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में पूर्ण सहयोग करेगी।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि आदिवासी क्षेत्रों में नॉन-पॉल्यूटिंग इंडस्ट्रीज और गारमेंट सेक्टर को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। आगामी दो वर्षों में आदिवासी क्षेत्रों की 25 हजार से अधिक महिलाओं को घर बैठे रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

हर्ष संघवी ने कहा कि वर्ष 2003 में शुरू हुई वाइब्रेंट गुजरात पहल के परिणामस्वरूप राज्य की जीडीपी 1.29 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर आज 27.09 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। पिछले 24 वर्षों की विकास यात्रा में ‘टीम गुजरात’ और राज्य के उद्यमियों ने चुनौतियों के बावजूद निरंतर प्रगति का मार्ग अपनाया है। उन्होंने बताया कि अब रीजनल कॉन्फ्रेंस में ‘ओपन डोर मीटिंग’ की नई व्यवस्था लागू की जाएगी, जिसके तहत मौजूदा उद्योगकारों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जाएगा और सरकारी अधिकारी सीधे संवाद स्थापित करेंगे।
सम्मेलन में उद्योगकारों, निवेशकों और नीति निर्माताओं की बड़ी भागीदारी रही तथा इसे दक्षिण गुजरात के औद्योगिक विकास के नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।



