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सूरत की 64 वर्षीय शोभाबेन शाह की अनोखी साधना, 90 भाषाओं में 75 हजार से अधिक बार लिखा नवकार मंत्र

विश्व नवकार महामंत्र दिवस पर बनी प्रेरणादायक मिसाल, एक वर्ष तक ब्रह्म मुहूर्त में साधना कर तैयार किए 55 ग्रंथ

सूरत। 9 अप्रैल को विश्व नवकार महामंत्र दिवस के अवसर पर सूरत की 64 वर्षीय शोभाबेन शाह ने अपनी अनोखी साधना से सभी को प्रेरित किया है। जैन परंपरा के आदिमंत्र नवकार मंत्र को उन्होंने 100 या 200 बार नहीं, बल्कि 75 हजार से अधिक बार 90 अलग-अलग भाषाओं और स्वरूपों में लिखकर एक अद्भुत उपलब्धि हासिल की है।
शोभाबेन शाह ने एक वर्ष तक लगातार ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 3 बजे से 7 बजे तक नवकार मंत्र लेखन की साधना की। इस दौरान उन्होंने करीब 55 पुस्तकों में नवकार महामंत्र लिखा। इन पुस्तकों में 550 वर्ष प्राचीन हस्तप्रति शैली, जैन समाज के शासन ध्वज, अष्ट मंगल प्रतीक, कमल, तितली, हृदय कमल और भगवान की विभिन्न प्रतिकृतियों में नवकार मंत्र को अलग-अलग भाषाओं में अंकित किया गया है।
शोभाबेन का कहना है कि किसी भी परिस्थिति में यदि व्यक्ति नवकार मंत्र का सच्चे मन से स्मरण करता है, तो उसे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि नवकार मंत्र लिखने से उनका मन आर्त ध्यान से धर्म ध्यान की ओर गया और नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर परिवर्तन हुआ।
उन्होंने बताया कि उनके गुरु साहब ने उन्हें एक पुस्तक दी थी। जब उन्होंने पहली बार नवकार मंत्र लिखा तो उन्हें विशेष अनुभूति हुई। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग रूपों में नवकार मंत्र लिखने का संकल्प लिया और निरंतर लेखन शुरू किया।
शोभाबेन ने ब्राह्मी लिपि में भी नवकार मंत्र लिखा, जबकि उन्हें यह लिपि पहले नहीं आती थी। उन्होंने मोबाइल के माध्यम से ब्राह्मी लिपि सीखी और एक महीने की मेहनत से ब्राह्मी लिपि में भी नवकार मंत्र की पुस्तक तैयार की।
शोभाबेन शाह की यह साधना न केवल जैन समाज बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक बन गई है। उनकी इस आध्यात्मिक उपलब्धि को विश्व नवकार महामंत्र दिवस पर विशेष सराहना मिल रही

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