
सूरत।कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन चंपालाल बोथरा ने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय युद्ध की परिस्थितियों के बीच देश के कपड़ा उद्योग में केवल 5-7 दिनों के भीतर ही यार्न, प्रोसेसिंग और विभिन्न रॉ-मटेरियल के भावों में अचानक बढ़ोतरी की घोषणाएँ कर दी गई हैं, जिससे पूरे टेक्सटाइल उद्योग में अस्थिरता और चिंता का माहौल बन गया है।
श्री बोथरा ने कहा कि युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है, लेकिन इतने कम समय में लागत बढ़ाकर पूरे उद्योग में तेजी का वातावरण बनाना उचित नहीं है। यदि युद्ध की स्थिति के कारण केवल एक सप्ताह के भीतर ही देश के टेक्सटाइल उद्योग में उत्पादन प्रभावित होने या बंद होने की चर्चा होने लगे, तो यह सरकार और उद्योग दोनों के लिए गंभीर चिंतन का विषय है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इस स्थिति का व्यापक मूल्यांकन करना चाहिए कि भारत का विशाल टेक्सटाइल उद्योग आज भी कितनी मात्रा में आयातित कच्चे माल पर निर्भर है। यदि वैश्विक संघर्ष का प्रभाव इतने कम समय में उद्योग की लागत पर दिखाई देने लगता है, तो यह संकेत है कि देश को रॉ-मटेरियल के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता है। MSME सेक्टर को मजबूत करने के साथ-साथ उन्हें स्थिर और उचित दर पर कच्चा माल उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है।

श्री बोथरा ने कहा कि यार्न मिलों और प्रोसेस हाउस द्वारा अचानक भाव बढ़ाने की घोषणाएँ उद्योग के लिए चिंता का विषय हैं। वास्तविकता यह है कि अधिकांश ट्रेडर्स अपना ग्रे कपड़ा 1 से 2 महीने पहले ही मिलों और प्रोसेस हाउस में प्रोसेसिंग के लिए भेज देते हैं। ऐसे में जो माल पहले से प्रोसेस में है उस पर नई दरें लागू करना उचित नहीं है। उस माल पर पुरानी दरें ही लागू होनी चाहिए क्योंकि ट्रेडर्स अपने ग्राहकों के ऑर्डर के अनुसार पूर्व निर्धारित कीमत पर माल तैयार करवाते हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि नई प्रोसेसिंग दरें केवल उस ग्रे कपड़े पर लागू की जाएँ जो आगे से मिलों और प्रोसेस
हाउस में प्रोसेस के लिए आएगा। साथ ही यदि कहीं कृत्रिम कमी बनाकर या अवसर का लाभ उठाकर कीमतें बढ़ाई जा रही हैं तो केंद्र सरकार और संबंधित विभागों को इसकी निगरानी कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। GST एवं अन्य विभागों को भी इस स्थिति पर नजर रखनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की अनुचित मुनाफाखोरी पर रोक लग सके।
श्री बोथरा ने व्यापारियों से अपील की कि वे घबराहट में अपने स्टॉक के भाव अनावश्यक रूप से न बढ़ाएँ और पुराने स्टॉक को संतुलित तरीके से बाजार में उपलब्ध कराएँ। पूर्व अनुभव बताते हैं कि ऐसे हालात कुछ समय बाद सामान्य हो जाते हैं। यदि व्यापारी अत्यधिक ऊँची लागत पर स्टॉक जमा करेंगे तो बाद में कीमतें सामान्य होने पर उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत का टेक्सटाइल उद्योग देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और निर्यात का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए सरकार, उद्योग और व्यापार—सभी को संतुलित और जिम्मेदार निर्णय लेने होंगे, ताकि बाजार में अनावश्यक भय या अस्थिरता का माहौल न बने और उद्योग की निरंतरता बनी रहे।



