
सूरत।अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में फ्यूल ऑयल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फ्यूल ऑयल यार्न बनाने में उपयोग होने वाले प्रमुख कच्चे माल में से एक है, इसलिए इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर यार्न के भाव पर पड़ा है। इसके चलते सूरत के टेक्सटाइल उद्योग, विशेष रूप से वीविंग सेक्टर के व्यापारी कठिनाई का सामना कर रहे हैं।
वीवर्स नेता तथा सचिन इंडस्ट्रियल सोसायटी के सचिव मयूर गोलवाला के अनुसार 4 मार्च को अंतरराष्ट्रीय बाजार में फ्यूल ऑयल की कीमत लगभग 73 डॉलर थी, जो बढ़कर 120 डॉलर तक पहुंच गई थी और बाद में शाम को करीब 100 डॉलर पर आ गई। इसके परिणामस्वरूप पिछले 7 से 10 दिनों में पॉलिएस्टर यार्न के दाम में लगभग 20 रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है।
वीवर्स का कहना है कि फिलहाल स्पिनर्स अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल के भाव के आधार पर ही यार्न की कीमत तय कर रहे हैं और वह भी रेडी डिलीवरी की शर्त पर। इससे वीवर्स के लिए उत्पादन जारी रखना कठिन हो गया है। अचानक बढ़े यार्न के दाम के कारण वीवर्स की पूंजी पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि ग्रे कपड़ा व्यापारियों से भुगतान अभी भी लगभग 30 दिनों के बाद मिलता है। ऐसे में बढ़ती लागत के बीच उत्पादन करना मुश्किल हो गया है। यदि ग्रे कपड़े का उत्पादन लागत के अनुसार लाभकारी नहीं रहता, तो वीवर्स के लिए सप्ताह में 2 से 3 दिन लूम बंद रखना ही बेहतर विकल्प हो सकता है।
नायलॉन यार्न पर MIP या ADD ड्यूटी न लगाने की मांग
उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार नायलॉन यार्न के दाम में भी पिछले कुछ दिनों में 25 से 30 रुपये प्रति किलो तक की वृद्धि हुई है। उद्योगकारों ने सरकार से सस्ते और अच्छी गुणवत्ता वाले आयातित यार्न उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाने की मांग की है। साथ ही आयातित नायलॉन यार्न पर MIP या ADD जैसी ड्यूटी न लगाने की भी मांग की गई है।
प्रतिस्पर्धा आयोग में शिकायत की तैयारी
उद्योग अग्रणियों ने आरोप लगाया है कि क्रूड ऑयल के बढ़े हुए भाव के अनुसार अभी चिप्स की बुकिंग नहीं हुई है, फिर भी यार्न के दाम बढ़ाए जा रहे हैं, जो कृत्रिम कार्टेलिंग का हिस्सा हो सकता है। इस मामले में आने वाले दिनों में कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया में शिकायत करने की तैयारी भी की जा रही है।




