
गुजरात हाईकोर्ट ने सामाजिक सुरक्षा अधिकारी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सभी पक्षकारों को नोटिस जारी की
मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिज़न्स एक्ट-2007 के तहत अपने पुत्र से भरण-पोषण प्राप्त करने के लिए माता-पिता द्वारा दायर की गई याचिका में गुजरात हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए पूरी कार्रवाई पर अंतरिम रोक (स्टे) लगा दी है।
इस मामले में याचिकाकर्ता एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) हैं। उनके माता-पिता ने मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल (डिप्टी कलेक्टर कार्यालय) में भरण-पोषण के लिए आवेदन किया था। इसके बाद मामला सामाजिक सुरक्षा अधिकारी को भेजा गया, जिन्होंने सीए पुत्र को नोटिस जारी की। इस कार्रवाई को सीए पुत्र ने अपने अधिवक्ता जमीर शेख के माध्यम से गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी।
याचिका में दलील दी गई कि सामाजिक सुरक्षा अधिकारी को इस प्रकार की कार्रवाई करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। कानून के प्रावधानों के अनुसार ऐसे मामलों की सुनवाई केवल मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल (डिप्टी कलेक्टर) द्वारा ही की जा सकती है। अधिकार-क्षेत्र के बिना जारी की गई नोटिस पूरी तरह अवैध है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों पर प्रथम दृष्टया संज्ञान लेते हुए नायब कलेक्टर, सामाजिक सुरक्षा अधिकारी (सूरत) तथा याचिकाकर्ता के माता-पिता को नोटिस जारी कर उनके जवाब तलब किए हैं। साथ ही, कोर्ट ने सामाजिक सुरक्षा अधिकारी के समक्ष लंबित संपूर्ण भरण-पोषण प्रक्रिया पर अंतरिम स्टे भी लगा दिया है।
अब आगामी सुनवाई में सभी पक्षकारों के जवाब प्राप्त होने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।




